Edited By Vijay, Updated: 21 Feb, 2026 11:13 PM

हिमाचल प्रदेश में हर साल मानसून के दौरान टूटने वाली सड़कों और करोड़ों के नुक्सान को रोकने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एक नई और व्यापक रोड ड्रेनेज पॉलिसी को मंजूरी दी है।
शिमला (ब्यूरो): हिमाचल प्रदेश में हर साल मानसून के दौरान टूटने वाली सड़कों और करोड़ों के नुक्सान को रोकने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एक नई और व्यापक रोड ड्रेनेज पॉलिसी को मंजूरी दी है। इस नीति का उद्देश्य पारंपरिक तरीकों को छोड़कर वैज्ञानिक और हाइड्रोलॉजिकल (जल विज्ञान) डिजाइन के आधार पर सड़कों का निर्माण और रखरखाव करना है।
सालाना हाे रहा हजारों करोड़ का नुक्सान
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में लोक निर्माण विभाग 40,000 किलोमीटर से अधिक सड़कों का रखरखाव करता है। पिछले कुछ वर्षों में खराब ड्रेनेज सिस्टम और भूस्खलन के कारण भारी नुक्सान हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक राज्य में वर्ष 2023 में 2400 करोड़ और 2025 में 3000 करोड़ रुपए का नुक्सान सिर्फ सड़कों को हुआ था।
क्या है नई पॉलिसी में खास?
नई पाॅलिसी के तहत अब ड्रेनेज सिस्टम बारिश की तीव्रता और जलग्रहण क्षेत्र के वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर बनाए जाएंगे। नई सड़क परियोजनाओं में 'बॉक्स कल्वर्ट' डिफॉल्ट ड्रेनेज स्ट्रक्चर होगा। इसमें कचरा नहीं फंसता और मशीनों से सफाई आसान होती है। आबादी वाले क्षेत्रों में नालियों को ढककर रखा जाएगा। रात में बेहतर दृश्यता के लिए रिफ्लैक्टर लगाए जाएंगे और खुले हिस्सों में ऊंचे कर्ब बनाए जाएंगे।
चरणबद्ध तरीके से होगा काम
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह नीति चरणबद्ध तरीके से लागू होगी। सबसे पहले आर्थिक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मुख्य सड़कों को प्राथमिकता दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल तकनीकी सुधार नहीं, बल्कि जनता की सुरक्षा और कनैक्टिविटी सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता है।
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