Edited By Swati Sharma, Updated: 01 Mar, 2026 12:00 PM

Shimla News: केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के तहत हिमाचल प्रदेश में सभी 28 लाख पारंपरिक बिजली मीटरों को स्मार्ट प्रीपेड मीटरों से बदलने का लक्ष्य रखा है। शक्ति और नवीन एवं अक्षय ऊर्जा राज्य मंत्री ने सूचित किया...
Shimla News: केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के तहत हिमाचल प्रदेश में सभी 28 लाख पारंपरिक बिजली मीटरों को स्मार्ट प्रीपेड मीटरों से बदलने का लक्ष्य रखा है। शक्ति और नवीन एवं अक्षय ऊर्जा राज्य मंत्री ने सूचित किया कि आरडीएसएस के तहत देश भर में लगभग 5.5 करोड़ स्मार्ट प्रीपेड मीटर पहले ही लगाये जा चुके हैं। वर्ष 2021-22 से 2025-26 की अवधि के लिए 3,03,758 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ 2023 में शुरू की गयी इस योजना का उद्देश्य बिजली वितरण क्षेत्र का आधुनिकीकरण करना और वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) की वित्तीय स्थिति को मजबूत करना है। हिमाचल प्रदेश में अब तक करीब आठ लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं।
हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड लिमिटेड (एचपीएसईबीएल) ने इससे पहले 2019 में एकीकृत ऊर्जा विकास योजना (आईपीडीएस) के तहत शिमला और धर्मशाला में स्मार्ट मीटरिंग की शुरुआत की थी। इस परियोजना में 1,51,740 मीटर लगाने की परिकल्पना की गयी थी-शिमला में 1,18,581 और धर्मशाला में 33,159-और इसे 2022-23 में पूरा किया गया था। पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के तहत पूर्ण स्मार्ट मीटरिंग के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राज्य भर के शेष उपभोक्ताओं को चरणबद्ध तरीके से इसमें शामिल किया जायेगा। केंद्र सरकार की योजना देश भर में लगभग 20 करोड़ पारंपरिक मीटरों को प्रीपेड स्मार्ट मीटरों से बदलने की है।
'स्मार्ट मीटरिंग एक परिवर्तनकारी सुधार'
शक्ति और नवीन एवं अक्षय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाईक ने कहा कि स्मार्ट मीटरिंग एक परिवर्तनकारी सुधार है। इसका उद्देश्य तकनीकी और व्यावसायिक नुकसान को कम करना, आपूर्ति की औसत लागत और प्राप्त औसत राजस्व के बीच के अंतर को कम करना और बिलिंग दक्षता में सुधार करना है। स्मार्ट मीटर वास्तविक समय में ऊर्जा की गणना, सटीक बिलिंग, मानवीय हस्तक्षेप में कमी और उपभोक्ता सशक्तीकरण को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने आगे कहा कि प्रीपेड सुविधा से वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) पर वित्तीय तनाव कम होगा, जबकि स्मार्ट मीटर से उत्पन्न उच्च-गुणवत्ता वाला डेटा एआई-आधारित मांग के पूर्वानुमान और छतों पर लगे सौर पैनलों व इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते लोड के बेहतर प्रबंधन में मदद करेगा, जिसमें हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य भी शामिल हैं।