Shimla: हिमाचल पर 1,00,000 करोड़ देनदारियां, कर्ज लेने वाले राज्यों में 5वें स्थान पर

Edited By Kuldeep, Updated: 10 Feb, 2026 10:30 PM

shimla himachal debt liabilities

राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) कटौती के बीच हिमाचल प्रदेश पर 1,00,000 करोड़ रुपए से अधिक कर्ज चढ़ गया है। ऐसे में कर्ज लेने वाले राज्यों की श्रेणी में राज्य 5वें स्थान पर पहुंच गया है।

शिमला (कुलदीप शर्मा): राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) कटौती के बीच हिमाचल प्रदेश पर 1,00,000 करोड़ रुपए से अधिक कर्ज चढ़ गया है। ऐसे में कर्ज लेने वाले राज्यों की श्रेणी में राज्य 5वें स्थान पर पहुंच गया है। इस स्थिति में आज हर पैदा होने वाले बच्चे पर करीब 1,33,000 रुपए कर्ज चढ़ गया है। प्रदेश के वित्तीय हालात कुछ इस कद्र बिगड़े हैं कि अगले 10 वर्ष में सरकार को 22,000 करोड़ रुपए कर्ज चुकाना है।

इस बीच सरकार पर सालाना वेतन के करीब 13837.36 करोड़ रुपए, पैंशन के 10,850 करोड़ व सबसिडी के 2,508 करोड़ रुपए चुकाने हैं। इन प्रतिबद्ध देनदारियों को चुकता करने में वर्ष में मिलने वाली औसतन करीब 9 हजार करोड़ रुपए से 10 हजार करोड़ रुपए की आर.डी.जी. मददगार होती थी, लेकिन इस पर अब विराम लग गया है। ऐसे में सरकार को अब कड़े निर्णय लेने के साथ वित्तीय अनुशासन से काम करना होगा, अन्यथा राज्य पर आने वाले समय में वित्तीय संकट और गहरा जाएगा।

कर्मचारी-पैंशनरों की 11 हजार करोड़ की अदायगियां लंबित
गंभीर वित्तीय हालात के कारण सरकार को इस समय कर्मचारी व पैंशनरों की 11 हजार करोड़ रुपए की अदायगियां करना शेष हैं। इसमें 10 हजार करोड़ रुपए नए वेतनमान के एरियर का कर्मचारी व पैंशनरों को भुगतान करना बाकी है। इसके अलावा 1 हजार करोड़ रुपए डी.ए. की बकाया देनदारियां करना शेष हैं।

कैबिनेट रैंक के बीच 5,000 करोड़ घाटे में निगम-बोर्ड
राज्य सरकार की तरफ से कैबिनेट रैंक के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष तैनात करने से सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (बोर्ड-निगम) पर इस समय 5,000 करोड़ रुपए घाटे में है। इसमें आम आदमी से जुड़े एचआरटीसी के कर्मचारी और पैंशनर मासिक अदायगी के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं। इसी तरह बिजली बोर्ड के हालात भी सुखद नहीं हैं।

भाजपा सरकार ने छोड़ा 76,630 करोड़ का कर्ज
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के सत्ता में आने से पहले राज्य पर करीब 76,630 करोड़ रुपए तक कर्ज था। पूर्व भाजपा सरकार के सत्ता में आने से पहले वर्ष 2017 में राज्य पर 47,906 करोड़ रुपए का कर्ज था। इसके बाद जब भाजपा ने सत्ता छोड़ी तो राज्य पर कर्ज बढ़कर 76,630 करोड़ तक पहुंच गया। अब वर्तमान सरकार के 3 वर्ष से अधिक का कार्यकाल समाप्त होने के बाद 1,00,000 करोड़ रुपए कर्ज पहुंच गया है।

रोजगार सिकुड़ा, विदेश से 2,030 करोड़ की कमाई
समय के साथ हिमाचल प्रदेश में रोजगार के अवसर सिकुड़ने लगे हैं। इस कारण युवा पीढ़ी अब विदेश में रोजगार के बेहतर अवसर तलाशने में जुट गई है। जानकारी के अनुसार राज्य से करीब 10 हजार युवा रोजगार की तलाश में विदेशों में जाते हैं। विदेश जाने वाले यह युवा हर वर्ष करीब 2,030 करोड़ रुपए अपने देश को भेजते हैं। इसके अलावा करीब 5 हजार युवा पढ़ाई के सिलसिले में विदेश जाते हैं। प्रदेश की जनसंख्या के हिसाब से प्रति 1 हजार लोगों पर यह संख्या महज 5.36 फीसदी है। देश में इस मामले में केरल का नाम सबसे ऊपर है।

वित्तीय संकट के बीच माननीयों का वेतन-पैंशन बढ़ा
वित्तीय संकट के बीच इस वर्ष माननीयों के वेतन में 24 फीसदी की बढ़ौतरी का निर्णय लिया गया। माननीयों के वेतन-भत्ते व पैंशन को 9 वर्ष की लंबी अवधि के बाद बढ़ाया गया है, जिससे सरकारी कोष पर सालाना करीब 24 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। हालांकि इस बढ़ौतरी के बीच 20 हजार टैलीफोन भत्ता समाप्त कर दिया गया है तथा बिजली व पानी का बिल भी माननीयों को खुद जमा करवाना होगा। अब मुख्यमंत्री को वेतन एवं भत्ते के साथ 3.50 लाख रुपए, मंत्री को 3.45 लाख रुपए और विधायक को 2.80 लाख रुपए मिलेंगे।

दैनिक भत्ते को 1,800 से बढ़ाकर 2,500 रुपए प्रतिदिन, निर्वाचन क्षेत्र भत्ते को 90,000 रुपए से बढ़ाकर 1.20 लाख और कार्यालय भत्ते को 30 हजार से बढ़ाकर 90 हजार रुपए प्रतिमाह किया गया है। मुफ्त यात्रा सीमा को बढ़ाकर 2.50 लाख रुपए किया गया है। पूर्व विधायकों की पैंशन 36 हजार रुपए से बढ़कर 50 हजार रुपए की गई है। अब तक पूर्व विधायक को 93,240 रुपए मासिक पैंशन मिलती थी, जो अब बढ़कर 1,29,500 रुपए हो जाएगी।

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