Edited By Vijay, Updated: 10 Feb, 2026 05:17 PM

सरकार व एचआरटीसी नियमों का उल्लघंना करते हुए जेएनएनयूआरएम की बसों को प्रदेश सहित बाहरी राज्यों में कलस्टर के बाहर चला रहे हैं। यह आरोप बस एवं कार ऑप्रेटर कन्फेडरेशन ऑफ इंडिया के राज्य अध्यक्ष मनोज राणा व हिमाचल प्रदेश निजी बस ऑप्रेटर संघ के...
शिमला (राजेश): सरकार व एचआरटीसी नियमों का उल्लघंना करते हुए जेएनएनयूआरएम की बसों को प्रदेश सहित बाहरी राज्यों में कलस्टर के बाहर चला रहे हैं। यह आरोप बस एवं कार ऑप्रेटर कन्फेडरेशन ऑफ इंडिया के राज्य अध्यक्ष मनोज राणा व हिमाचल प्रदेश निजी बस ऑप्रेटर संघ के पदाधिकारियों ने लगाए हैं। संघ पदाधिकारियों ने कहा कि राज्य सरकार व एचआरटीसी नियमों का उल्लंघन कर रही है। जेएनएनयूआरएम योजना के अंतर्गत खरीदी गई बसों को केवल निर्धारित क्लस्टर क्षेत्रों में ही चलाया जाना था, लेकिन पिछले दस वर्षों से अधिक समय से इन बसों को अवैध रूप से क्लस्टर से बाहर पठानकोट, तलवाड़ा, होशियारपुर, नालागढ़, बद्दी, कालका, अंबाला और चंडीगढ़ जैसे लंबी दूरी के मार्गों पर चलाया जा रहा है। बस एवं कार ऑप्रेटर कन्फेडरेशन ऑफ इंडिया के राज्य अध्यक्ष मनोज राणा सहित, उपाध्यक्ष ओम प्रकाश ठाकुर, महेंद्र मनकोटिया, नसीब सैनी, बस ऑप्रेटर्ज रमेश कमल, विजय, रवि दत्त, मनोज, रजत, हंस ठाकुर, राजेश पटियाल, रोशन व विरेंद्र ठाकुर कहा कि हाईकोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि जेएनएनयूआरएम बसें क्लस्टर से बाहर नहीं चलेंगी। इसके बावजूद एचआरटीसी और परिवहन विभाग जानबूझकर इन आदेशों की अवहेलना कर रहा हैए जो सीधे-सीधे अदालत की अवमानना है जो सीधेतौर पर न्यायालय की अवमानना के दायरे में आता है।
जेएनएनयूआरएम को पूरी तरह किया है कर मुक्त
निजी बस ऑप्रेटरों ने आरोप आरोप लगाया गया है कि निजी बस ऑप्रेटर नियमित रूप से विशेष सड़क कर और टोकन कर का भुगतान कर रहे हैं जबकि जेएनएनयूआरएम बसें उन्हीं मार्गों पर और समान किराए पर चलने के बावजूद इन करों से पूरी तरह मुक्त हैं। इसे राज्य प्रायोजित अनुचित प्रतिस्पर्धा करार देते हुए कहा गया कि इससे निजी बस ऑप्रेटरों को भारी आर्थिक नुक्सान उठाना पड़ रहा है।
दोंनो संघ ने सरकार से की मांग
दोनों संघों ने सरकार से मांग की है कि जेएनएनयूआरएम बसों के अवैध संचालन को संरक्षण देने वाले परिवहन विभाग और एचआरटीसी के अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही इन बसों से पिछले 10 वर्षों का विशेष सड़क कर और टोकन कर पूर्व प्रभाव से वसूला जाए। यदि सरकार इन बसों से कर नहीं लेती हैए तो निजी बस ऑपरेटरों को भी पिछले 10 वर्षों के लिए समान कर छूट दी जाए।
15 दिनों का दिया अल्टीमेटम
संघों ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर इस गंभीर विषय पर न्यायसंगत, पारदर्शी और कानूनसम्मत निर्णय नहीं लिया गया तो उन्हें उच्च न्यायालय में याचिका, अवमानना कार्यवाही और राज्यव्यापी आंदोलन और हड़ताल जैसे कठोर कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और परिवहन विभाग की होगी।