Edited By Vijay, Updated: 12 Feb, 2026 01:11 PM

हिमाचल प्रदेश में एक बेहद खौफनाक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासन और स्थानीय लोगों को सकते में डाल दिया है।
शिमला/रोहड़ू (बशनाट): हिमाचल प्रदेश में एक बेहद खौफनाक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासन और स्थानीय लोगों को सकते में डाल दिया है। शिमला जिले के रोहड़ू उपमंडल के टिक्कर क्षेत्र से सटे ब्रेष्टू गांव में करीब 130 लाेगाें को सप्लाई होने वाले पीने के पानी में अज्ञात लोगों द्वारा जहरीला पदार्थ (कीटनाशक) मिलाने की साजिश रची गई। गनीमत यह रही कि समय रहते इस खतरे का पता चल गया, जिससे एक बड़ा सामूहिक हादसा टल गया।
भोजन के दौरान आई गंध और बज गई खतरे की घंटी
जानकारी के अनुसार ब्रेष्टू गांव निवासी आदर्श शर्मा पुत्र स्वर्गीय विनोद शर्मा जब अपने घर में भोजन कर रहे थे, तभी उन्हें पीने के पानी से दवा जैसी बेहद तेज और अजीब गंध महसूस हुई। आदर्श शर्मा ने अपनी सूझबूझ का परिचय देते हुए इसे नजरअंदाज नहीं किया। उन्होंने तुरंत अपने पड़ोसियों को सतर्क किया और सभी से नल बंद करने की अपील की। जब गांव के अन्य लोगों ने भी पानी में उसी तरह की गंध की पुष्टि की तो मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जल शक्ति विभाग को सूचित किया गया। सूचना मिलते ही विभाग की टीम मौके पर पहुंची और तत्काल प्रभाव से पूरे गांव की पानी की सप्लाई रोक दी।
सेब में इस्तेमाल होने वाली कीटनाशक दवा के मिले प्रमाण, टैंक खाली करवाया
जल शक्ति विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पानी के टैंक को खाली करवाया और पानी के नमूने जांच के लिए लैब भेजे। विभागीय जांच में जो खुलासा हुआ वह डराने वाला है। पानी में सेब के बगीचों में इस्तेमाल होने वाली कीटनाशक दवा के शुरुआती प्रमाण मिले हैं। आशंका जताई जा रही है कि किसी अज्ञात शातिराें व्यक्ति ने द्वेष भावना या किसी साजिश के तहत पाइप लाइन या मुख्य टैंक में यह जहरीला पदार्थ मिलाया था। यदि समय रहते गंध का पता नहीं चलता तो गांव के लोग इस दूषित पानी का उपयोग पीने और खाना बनाने में कर लेते, जिससे सैंकड़ों लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा सकता था।

फाेरैंसिक जांच के लिए भेजे गए सैंपल
रोहड़ू पुलिस ने इस घटना को अत्यंत गंभीरता से लिया है। आदर्श शर्मा की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 279 के तहत थाना रोहड़ू में मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने पानी के सैंपल फोरैंसिक लैब भेजे हैं ताकि जहर की सटीक मात्रा और प्रकार का पता लगाया जा सके। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि पानी में यह दवा किसने और किन परिस्थितियों में मिलाई। इसके साथ ही आसपास के जल स्रोतों और टैंकों की सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की जा रही है। गांव में जल आपूर्ति को पूरी तरह साफ करने की प्रक्रिया जारी है और प्रशासन ने फिलहाल लोगों को सुरक्षित स्रोतों से पानी का उपयोग करने की सलाह दी है।