नूरपुर के हितों का क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने नहीं रखा ध्यान, लुट चुका है नूरपुर का नूर : निक्का

Edited By prashant sharma, Updated: 11 Jan, 2022 03:44 PM

people s representatives of area did not take care of interests of nurpur

नूरपुर भाजपा जिला महामंत्री रणवीर सिंह निक्का ने कंडवाल में आयोजित पत्रकार वार्ता में पक्ष और विपक्ष के नेताओं पर आरोप लगाते हुए कहा कि नूरपुर के हितों का क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने ध्यान नहीं रखा जिसके कारण नूरपुर का नूर लुट चुका है।

नूरपुर (संजीव महाजन) : नूरपुर भाजपा जिला महामंत्री रणवीर सिंह निक्का ने कंडवाल में आयोजित पत्रकार वार्ता में पक्ष और विपक्ष के नेताओं पर आरोप लगाते हुए कहा कि नूरपुर के हितों का क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने ध्यान नहीं रखा जिसके कारण नूरपुर का नूर लुट चुका है। रणवीर सिंह निक्का ने कहा कि पठानकोट-मंडी फोरलेन परियोजना में प्रभावितों के साथ हुआ अन्याय इस बात का उदाहरण है। निक्का ने कहा कि फोरलेन का सर्वे जब हुआ था तो कांग्रेस की सरकार थी तथा नूरपूर में विधायक कांग्रेस के अजय महाजन थे। उन्होंने कहा कि सर्वे में फोरलेन के लिए एक अलग सड़क का प्रपोजल सरकार को दिया जा सकता था जिसका प्रस्ताव फोरलेन संघर्ष समिति ने सरकार को दिया था। उन्होंने कहा कि यदि नई सड़क फोरलेन के लिए प्रस्तावित होती तो आज लोगों की बहुमूल्य भूमि फोरलेन की जद में आने से बच जाती। उन्होंने कहा कि उसके बाद नूरपुर के स्थानीय विधायक राकेश पठानिया ने भी उक्त मुद्दे पर प्रभावितों को उचित मुआवजा नहीं दिला पाए। जिसके चलते फोरलेन प्रभावित परेशान है। 

निक्का ने कहा कि प्रस्तावित पठानकोट-मंडी फोरलेन परियोजना से भी नूरपुर के प्रभावितों के साथ अन्याय हुआ है। लोगों की बहुमूल्य भूमि का दाम 20 से 25 हजार प्रति मरला आंका गया। लोग पहले ही पोंग बांध बनने के कारण विस्थापित हुए थे, अब उसके बाद फोरलेन बनने से विस्थापित हो रहे है। उन्होंने कहा कि लोगों को न तो उचित मुआवजा मिल रहा है और न ही भूमि के बदले भूमि की गारंटी। सरकार से यह मांग है कि फोरलेन परियोजना के तहत प्रभावित्तों को उचित मुआवजा मिले तथा भूमि हीन होने वाले प्रभावितो को भूमि अलॉट करें। नूरपुर क्षेत्र में किसानों को खैंरो की कटाई का मुआवजा पिछले वर्ष के मुकाबले नहीं मिल रहा है। नूरपुर के बरंडा, ग्योरा, सुतराहड़ आदि क्षेत्रों के दौरे के दौरान जमीदारों ने यह दुख जताया है कि इस वर्ष खैंरो की कटान का 4000 से 4200 प्रति खैर दिया जा रहा है जबकि पिछले वर्ष 2020-21 में 5500 तक रेट दिया गया था। निक्का ने कहा कि खैर का कटान दस बर्ष बाद होता है, ऐसे में लोगों को आस होती है कि खैर के कटान से आर्थिकी मजबूत होगी। लेकिन ठेकेदारों द्वारा रेट कम देने से जमीदार रोषित है। निक्का ने सरकार व सम्बंधित विभाग से इस विषय पर गम्भीरता से कार्यवाही करने की मांग की है।
 

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