Himachal Panchayat Election: पच्छाद की शीना पंचायत में इस बार भी नहीं होगा मतदान, ग्रामीणों ने फिर कायम की मिसाल

Edited By Vijay, Updated: 06 May, 2026 04:41 PM

no voting in sheena panchayat again this time villagers set precedent

पंचायत चुनावों को लेकर जहां प्रदेशभर में राजनीतिक माहौल गर्माने लगा है, वहीं सिरमौर जिला की शीना पंचायत ने लगातार दूसरी बार ऐसा उदाहरण पेश किया है, जिसकी क्षेत्रभर में चर्चा हो रही है।

सराहां: पंचायत चुनावों को लेकर जहां प्रदेशभर में राजनीतिक माहौल गर्माने लगा है, वहीं सिरमौर जिला की शीना पंचायत ने लगातार दूसरी बार ऐसा उदाहरण पेश किया है, जिसकी क्षेत्रभर में चर्चा हो रही है। पंचायत वासियों ने आपसी सहमति और भाईचारे का परिचय देते हुए पंचायत प्रधान, उपप्रधान और वार्ड सदस्यों का निर्विरोध चयन कर लिया है। ऐसे में इस बार भी पंचायत में मतदान नहीं होगा। दरअसल सिरमौर जिले के पच्छाद उपमंडल की शीना पंचायत वर्ष 2021 में डिलमन पंचायत से अलग होकर अस्तित्व में आई थी। पहली बार गठन के दौरान भी यहां आम सहमति से चुनाव हुए थे और अब दूसरी बार भी ग्रामीणों ने उसी परंपरा को कायम रखा है। इससे पहले जिले की दाड़ो देवरिया और टटियाना पंचायत भी निर्विरोध चुनी जा चुकी हैं। 

आम सहमति से चुने प्रधान-उपप्रधान, भाईचारे और एकता की हो रही सराहना
शीना पंचायत घर में आयोजित आम सभा में बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। बैठक में पूर्व प्रधान सुशीता देवी, पूर्व बीडीसी सदस्य जगदीश चंद, पूर्व उपप्रधान सुभाष अत्री, पूर्व उपप्रधान कृष्ण शर्मा और पूर्व प्रधान उषा सूद सहित कई गण्यमान्य लोग उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से यशवंत सिंह ठाकुर को पंचायत प्रधान और देवराज कश्यप को उपप्रधान चुना। हालांकि कई पंचायतों में निर्विरोध चुने जाने को लेकर बैठकों का दौर जारी है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि पंचायती राज चुनाव की नामांकन प्रक्रिया समाप्त होने के बाद ही सामने आ सकेगी। बहरहाल, शीना पंचायत के इस फैसले की क्षेत्रभर में सराहना हो रही है और लोग इसे सामाजिक एकता और आपसी विश्वास की मिसाल बता रहे हैं।

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शिक्षक से पंचायत प्रधान बने यशवंत सिंह ठाकुर
नवनिर्वाचित प्रधान यशवंत सिंह ठाकुर हाल ही में शिक्षा विभाग से सीएचटी पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। वहीं उपप्रधान चुने गए देवराज कश्यप पहले भी डिलमन पंचायत में उपप्रधान की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। प्रधान बनने के बाद यशवंत सिंह ठाकुर ने कहा कि पंचायत में पूरी प्रक्रिया गैर-राजनीतिक तरीके से पूरी की गई है और ग्रामीणों ने जो जिम्मेदारी उन्हें सौंपी है, उसे वह पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ निभाने का प्रयास करेंगे।

ग्रामीणों के फैसले से बची चुनावी खींचतान
ग्रामीणों का मानना है कि पंचायत चुनावों में कई बार आपसी मतभेद, गुटबाजी और पैसों का खेल देखने को मिलता है, जिससे गांव का माहौल प्रभावित होता है। ऐसे में आम सहमति से प्रतिनिधियों का चयन समाज के लिए सकारात्मक संदेश है। ग्रामीणों ने कहा कि यदि अन्य पंचायतें भी इसी तरह आपसी सहमति से चुनाव प्रक्रिया पूरी करें तो करोड़ों रुपए के चुनावी खर्च को बचाने के साथ-साथ गांवों में भाईचारा और आपसी मेलजोल भी मजबूत होगा।

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