Himachal: शिलाई की टटियाना पंचायत में अनोखी परंपरा, वोट की जगह लकी ड्रॉ से चुने जनप्रतिनिधि

Edited By Vijay, Updated: 03 May, 2026 06:59 PM

people s representatives elected through lucky draw instead of voting

माचल प्रदेश के जिला सिरमौर के अंतर्गत शिलाई विधानसभा क्षेत्र के शाटी पाशी का चौंतरा और ग्राम पंचायत टटियाना में आज एक अनोखी और ऐतिहासिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए पंचायत प्रतिनिधियों का चयन सर्वसम्मति से पर्ची डालकर लकी ड्रॉ के माध्यम से किया गया।

पांवटा साहिब (कपिल): हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के अंतर्गत शिलाई विधानसभा क्षेत्र के शाटी पाशी का चौंतरा और ग्राम पंचायत टटियाना में आज एक अनोखी और ऐतिहासिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए पंचायत प्रतिनिधियों का चयन सर्वसम्मति से पर्ची डालकर लकी ड्रॉ के माध्यम से किया गया। यह पूरी प्रक्रिया महासू महाराज मंदिर टटियाना के प्रांगण में आयोजित की गई, जहां ग्रामीणों की मौजूदगी में महासू महाराज को साक्षी मानकर चयन संपन्न हुआ। इस दौरान प्रधान पद के लिए पूनम शर्मा, उपप्रधान पद के लिए दाता राम शर्मा और बीडीसी सदस्य के रूप में प्रियंका शर्मा का चयन किया गया। 

गांव में यह अनूठी व्यवस्था वर्ष 2020 में शुरू की गई थी, जिसके तहत गांव के 4 बेड़ों (परिवार समूहों) से नामित प्रतिनिधियों के नाम पर्चियों में डालकर लॉटरी के माध्यम से चयन किया जाता है। यह लगातार दूसरी बार है जब इसी प्रक्रिया के तहत पंचायत प्रतिनिधियों का चुनाव हुआ है। गांव के निवासी डॉ. अनिल शर्मा ने बताया कि इस व्यवस्था का उद्देश्य गांव में आपसी भाईचारा बनाए रखना, चुनावी खर्च को कम करना और बिना किसी विवाद के शांतिपूर्ण तरीके से प्रतिनिधियों का चयन करना है। उनका कहना है कि पारंपरिक चुनावों में अक्सर प्रतिस्पर्धा और मतभेद बढ़ जाते हैं, जबकि इस प्रणाली से सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित होती है।

पूरी चयन प्रक्रिया को गांव की प्रज्ञा मंडल, नव युवक मंडल, महासू मंदिर समिति और महिला मंडल ने मिलकर सफलतापूर्वक आयोजित किया। चयन के बाद सभी प्रतिनिधियों को ईमानदारी और निष्पक्षता से कार्य करने तथा गांव के समग्र विकास के लिए प्रयासरत रहने की शपथ दिलाई गई। साथ ही यह भी तय किया गया कि ये समितियां समय-समय पर उनके कार्यों की निगरानी करेंगी और आवश्यक दिशा-निर्देश भी देंगी। हालांकि इस अनोखे तरीके को लेकर क्षेत्र में मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। जहां कई लोग इसे सामाजिक एकता और पारदर्शिता की मिसाल मानकर सराह रहे हैं, वहीं कुछ लोग इसे अलोकतांत्रिक करार देते हुए इसकी आलोचना भी कर रहे हैं। इसके बावजूद, गांववासियों ने इस पहल का स्वागत करते हुए एकता, सहयोग और सौहार्द का संदेश दिया है, जो अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणादायक बन सकता है।

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