कोरोना के बढ़ते मामलों पर विक्रमादित्य ने जताई चिंता, सरकार पर जड़ा ये आरोप

Edited By Vijay, Updated: 27 Sep, 2020 04:16 PM

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कांग्रेस विधायक विक्रमादित्य सिंह ने प्रदेश में दिनोंदिन बढ़ते कोविड-19 के मामलों पर चिंता प्रकट करते हुए प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया है कि वह इस महामारी से निपटने में पूरी तरह असफल साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान इस महामारी की रोकथाम...

शिमला (योगराज): कांग्रेस विधायक विक्रमादित्य सिंह ने प्रदेश में दिनोंदिन बढ़ते कोविड-19 के मामलों पर चिंता प्रकट करते हुए प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया है कि वह इस महामारी से निपटने में पूरी तरह असफल साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान इस महामारी की रोकथाम पर कम और अपनी राजनीति पर ज्यादा है। उन्होंनेे कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह अस्त-व्यस्त होकर रह गई हैं। सरकार का स्वास्थ्य सेवाओं की ओर कोई ध्यान नहीं है।

उन्होंने कहा कि गत दिनों शिमला के दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में एक कोरोना संक्रमित महिला की आत्महत्या ने कोविड केंद्रों में व्यवस्था की पूरी पोल खोल दी है। उन्होंने कहा कि सरकार ने कोरोना संक्रमित लोगों को रामभरोसे छोड़ दिया है। अस्पतालों में इन्हें कोई भी सुविधा व उचित देखरेख नहीं मिल रही है, जिससे लोगों में भय का माहौल बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमित लोंगो की देखरेख की कोई उचित व्यवस्था न होना और भी दुखदाई है। आज प्रदेश में जिस प्रकार कोरोना से मौतों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है वह प्रदेश के लिए बहुत ही चिंता का विषय है।

उन्होंने कहा है कि दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल के मेडिकल सुपरिटैंडैंट लोकेंद्र शर्मा ने भी प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं विशेषकर रिपन अस्पताल में कमियों को लेकर जो बातें कही हैं, उससे सरकार की पूरी पोल खुलती है। प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं में बढ़ता राजनीतिक हस्तक्षेप व भ्रष्टाचार इसका मुख्य कारण माना जा सकता है।अस्पतालों में जिस प्रकार डॉक्टरों, पैरा मेडिकल स्टाफ व अन्य सहायकों की कमियां डॉक्टर लोकेंद्र शर्मा ने गिनाई हंै वह बहुत ही चिंता का विषय है। सरकार इन कमियों को दूर करने की बजाय डॉक्टरों को इधर से उधर पटकने में लगी है।

उन्होंने कहा कि कोविड केंद्रों में न तो उपयुक्त संख्या में पीपीई किट हैं और न ही टैस्टिंग किट्स। सरकार ने जब प्रदेश में कोरोना का एक भी मामला नहीं था तो बड़े जोरोंशोरों से अपनी पीठ यह कह कर थपथपाई थी कि प्रदेश सरकार ने इसकी रोकथाम के सख्त एहतियाती उपाय किए हैं। सरकार के ये सारे दावे हवा-हवाई साबित हुए हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि वह अस्पतालों में डॉक्टरों व पैरा मेडिकल स्टाफ के रिक्त पदों को तुरंत भरते हुए इनकी अदला-बदली पर फिलहाल तब तक रोक लगाए जब तक कि प्रदेश में कोरोना माहमारी पर अंकुश नहीं लग जाता।

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