Edited By Kuldeep, Updated: 04 Jan, 2026 07:17 PM

पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना का महज नाम ही बदला है, लेकिन हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने तो संस्थान ही बंद कर डाले।
मंडी (रजनीश): पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना का महज नाम ही बदला है, लेकिन हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने तो संस्थान ही बंद कर डाले। मंडी में पत्रकारों से बात करते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस की ओर से बेवजह शोर मचाया जा रहा है कि इस योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाकर इसका स्वरूप ही बदल दिया है। उन्होंने कहा कि जब भी सरकारें बनती हैं तो अपनी योजनाएं चलाती हैं। इन योजनाओं में जमीनी स्तर पर फीडबैक लेकर सुधार किया जाता है। उसी प्रकार केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने संसद में एक एक्ट लाया जिसका नाम विकसित भारत रोजगार आजीविका मिशन रखा। जिसे वी.बी.जी.राम.जी-2025 के नाम से पुकारा जाता है। विपक्ष ने इसका विरोध किया, जबकि इस विरोध का कोई आधार नहीं है। उन्होंने कहा कि जबसे भारत आजाद हुआ है रोजगार और अन्य योजनाओं के नाम बदलते रहे हैं।
रोजगार गारंटी योजना तो आजादी से पूर्व अंग्रेजों के जमाने में भी ऐसी योजना थी। वर्ष 1989 में कांग्रेस जवाहर रोजगार योजना लेकर आई। जो वर्ष 1999 में जवाहर समृद्धि योजना, 2001 में पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना, 2006 में नरेगा बन गई और 2009 में इसका नाम मनरेगा रखा गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकार में भी इस योजना का नाम परिवर्तित हुआ इसका भाव नहीं बदला। जयराम ठाकुर ने कहा कि 2014 में जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने तो विपक्ष ने शोर मचाना शुरू कर दिया कि मनरेगा को बंद कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि हकीकत यह है कि मोदी जी के शासन में मनरेगा की राशि में अपेक्षाकृत बढ़ौतरी हुई है। यूपीए की सरकार ने जहां मनरेगा पर कुल 2 लाख 13 हजार करोड़ की राशि खर्च की है, वहीं नरेंद्र मोदी की सरकार ने दस सालों में मनरेगा पर 8 लाख 53 हजार करोड़ रुपए की राशि खर्च की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की ओर से यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि नाम बदलने के साथ ही इस योजना को कमजोर किया जा रहा है।
हिमाचल में 90:10 की ही रेशो रहेगी
उन्होंने कहा कि देश के अन्य राज्यों में मनरेगा के बजट में 60-40 की रेशो रहेगी। वहीं पूर्वोत्तर के राज्यों और पहाड़ी प्रदेशों जिसमें हिमाचल प्रदेश भी शामिल है। इसमें केंद्र की ओर से 90 प्रतिशत और राज्य का हिस्सा 10 प्रतिशत रहेगा। इसके अलावा पहले मनरेगा के तहत कार्यदिवस सौ होते थे अब बढ़ाकर 125 कर दिए गए हैं। सबसे बढ़कर पंचायत स्तर पर मनरेगा राशि महिला मंडल, युवक मंडल भवनों और पंचायत स्तर पर बनने वाले भवनों पर खर्च की जा सकेगी। इसके चलते अब मनरेगा की राशि रास्तों, गड्ढे बनाने और भरने के बजाय ढांचागत विकास पर भी खर्च होगी।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 को लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए इसमें परिवर्तन किया गया जबकि विपक्ष की ओर से बेवजह के शगूफे छोड़े जा रहे हैं। इस अवसर पर पूर्व मंत्री एवं सदर के विधायक अनिल शर्मा, विधायक राकेश जम्वाल, इंद्र सिंह गांधी, अजय राणा व निहाल चंद आदि मौजूद रहे।