Mandi: देव मार्कंडेय ऋषि ने जलाई थी त्रिलोकीनाथ मंदिर में अमर ज्योेति

Edited By Kuldeep, Updated: 17 Feb, 2026 06:28 PM

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मंडी जनपद और सराज घाटी के अधिष्ठाता देव मार्कंडेय ऋषि का महाशिवरात्रि महोत्सव और मंडी रियासत के साथ गहरा नाता है।

मंडी (फरेंद्र ठाकुर): मंडी जनपद और सराज घाटी के अधिष्ठाता देव मार्कंडेय ऋषि का महाशिवरात्रि महोत्सव और मंडी रियासत के साथ गहरा नाता है। दिल्ली, त्रिलोकीनाथ और राेहतांग के ब्यास ऋषि में कठाेर तपस्या करने के बाद देव मार्कंडेय ऋषि ने सराज घाटी के सुनारु क्षेत्र को अपनी तपोस्थली बनाया था। मान्यता के अनुसार लाहौल-स्पीति के त्रिलोकीनाथ मंदिर में दशकों से जली आ रही पवित्र अमर ज्योति को देव मार्कंडेय ऋषि ने जलाया था। इसके अलावा रियासतों के दौर में देवता और मंडी के राजा का एक वृत्तांत आज भी प्रचलित है। कहा जाता है कि एक बार मंडी के राजा ने देवता को राज दरबार बुलाया और खुद ही वह दरबार में पहुंचने में लेट हो गए। इसी के चलते मार्कंडेय ऋषि गुस्सा होकर दरबार से चले गए। देवता के पुजारी बलदेव राज ने बताया कि राजा के देरी से आने पर जब देवता राजदरबार से बाहर निकले तो राजा वहां पर पहुंच गए। राजा की गाड़ी को आता देखकर देवता के देवरथ ने राजा की गाड़ी का शीशा तोड़ दिया। इस पर राजा रुष्ट हो गए और उन्होंने अगले दिन राजदरबार में देवता और देवलुओं की पेशी लगा दी। राजा के क्रोध से देवता के देवलू विचलित हो गए। अगले दिन देवलू देवता के साथ राजदरबार में पहुंचे। ऋषि मार्कंडेय के देवव्रत के तेज और उग्र रूप को देखकर राजा को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने देवता का आदर सत्कार किया।

देवता का एक मोहरा बदलता रहता है अपना रंग
देवता के देवरथ में काले बाल लगे हुए थे। राजा ने उनकी वरिष्ठता को देखकर उन्हें सफेद बाल अर्पित किए। देवता के दूसरे पुजारी नीटू शर्मा ने बताया कि देवता के मूल स्थान पर एक मोहरा ऐसा भी है जो कभी-कभार अपना रंग बदलता है। मोहरा कभी लाल रंग का हो जाता है, तो कभी सफेद रंग का। देवता का मूल स्थान कुल्लू जिले केेे थरास में है। बता दें कि महाशिवरात्रि महोत्सव में हर देवता की अपनी एक अलग कहानी है और कहीं न कहीं यह कहानी शिवरात्रि महोत्सव और मंडी रियासत के राजा से जुड़ी हुई है।

पुत्र प्राप्ति और चरम रोग दूर करने में सक्षम देव मार्कंडेय
मान्यता के अनुसार देव मार्कंडेय ऋषि पुत्र प्राप्ति और चरम रोग दूर करने में सक्षम हैं जिसका प्रमाण आज भी देवभूमि समेत कुल्लू और मंडी जिले में सैंकड़ों भक्त हैं। देवता के शुद्ध जल को पिलाकर पीड़ित रोग से मुक्ति पाता है। इसके अलावा देवता भूत-प्रेतों को निकालने के लिए मास्टर माने जाते हैं। माना जाता है कि देवता के पास सच्ची श्रद्धा से मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है।

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