Chamba: कुदरती आफत पर भारी पड़ा इंसानी हाैसला, ग्रामीणाें ने 3 फुट बर्फ और माइनस तापमान में ऐसे बचाई 14 वर्षीय बच्चे की जान

Edited By Vijay, Updated: 31 Jan, 2026 12:40 PM

human resilience prevailed over the fury of nature

चम्बा जिले का जनजातीय क्षेत्र पांगी इस समय भारी बर्फबारी के चलते कुदरत के कड़े इम्तिहान से गुजर रहा है। घाटी न केवल शेष दुनिया से पूरी तरह कट गई है, बल्कि भारी हिमपात के कारण एक गांव का दूसरे गांव से संपर्क भी टूट चुका है।

पांगी/चम्बा (वीरू राणा): चम्बा जिले का जनजातीय क्षेत्र पांगी घाटी इस समय भारी बर्फबारी के चलते कुदरत के कड़े इम्तिहान से गुजर रहा है। घाटी न केवल शेष दुनिया से पूरी तरह कट गई है, बल्कि भारी हिमपात के कारण एक गांव का दूसरे गांव से संपर्क भी टूट चुका है। इसी 'सफेद आफत' के बीच शुक्रवार काे इंसानियत, साहस और प्रशासनिक मुस्तैदी की एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने सभी का दिल जीत लिया।

घटना पांगी घाटी के सबसे दूरदराज और दुर्गम गांव शुण की है। यहां रहने वाले भूपेंद्र के 14 वर्षीय बेटे साहिल की तबीयत वीरवार रात अचानक बिगड़ गई। बाहर 2 से 3 फुट बर्फ की मोटी चादर बिछी थी और रास्ते पूरी तरह बंद थे। हाड़ कंपा देने वाली ठंड के बीच परिवार के सामने बेटे की जान बचाने की बड़ी चुनौती थी।

रास्ते बंद होने के बावजूद ग्रामीणों ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने तय किया कि वे साहिल को अपनी पीठ पर उठाकर अस्पताल पहुंचाएंगे। शुक्रवार सुबह करीब 8 बजे जब तापमान शून्य से नीचे (माइनस में) था, साहिल के परिजन और ग्रामीण उसे पीठ पर लादकर मुख्यालय किलाड़ की ओर पैदल ही निकल पड़े। इसी दौरान पंचायत प्रतिनिधियों ने उपमंडल दंडाधिकारी पांगी को फोन कर स्थिति की गंभीरता से अवगत कराया।

सूचना मिलते ही एसडीएम पांगी अमन दीप ने एक पल की भी देरी नहीं की और प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया। एसडीएम ने लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिए कि सड़क जहां तक भी खुली है, वहां तक फौरन गाड़ी भेजी जाए। विभाग की फोर बाई फोर कैंपर गाड़ी तुरंत रवाना हुई और सिद्ध मंदिर तक पहुंचने में कामयाब रही, जहां तक सड़क बहाल थी।

ग्रामीणों के पहुंचने पर प्रशासन की टीम ने सिद्ध मंदिर के पास बच्चे को अपनी गाड़ी में शिफ्ट किया और सुरक्षित रूप से सिविल अस्पताल किलाड़ पहुंचाया। एसडीएम अमन दीप ने बताया कि आपातकालीन स्थितियों के लिए मशीनरी के इस्तेमाल के निर्देश दिए गए हैं। इस घटना ने साबित कर दिया कि ग्रामीणों के बुलंद हौसले और प्रशासन के समय पर मिले साथ से बड़ी से बड़ी मुश्किल भी आसान हो सकती है।

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