Edited By Vijay, Updated: 15 Mar, 2026 05:08 PM

हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का दूसरा चरण 18 मार्च से शुरू होने जा रहा है। डल्हौजी में आयोजित एक विशेष पत्रकार वार्ता में विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने सत्र की रूपरेखा सांझा की।
डल्हौजी (शमशेर): हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का दूसरा चरण 18 मार्च से शुरू होने जा रहा है। डल्हौजी में आयोजित एक विशेष पत्रकार वार्ता में विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने सत्र की रूपरेखा सांझा की। इसके साथ ही उन्होंने वैश्विक स्तर पर चल रहे ईरान-इजराइल युद्ध को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए प्रदेश और केंद्र सरकार को सतर्क रहने की सलाह दी है।
13 बैठकों में तय होगी प्रदेश के विकास की दिशा
विधानसभा अध्यक्ष ने जानकारी देते हुए बताया कि बजट सत्र का यह दूसरा चरण 18 मार्च से शुरू होकर 3 अप्रैल तक चलेगा। इस पूरी अवधि के दौरान सदन में कुल 13 बैठकें आयोजित की जाएंगी। सत्र की शुरूआत राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के साथ होगी। इसके बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा सदन में प्रदेश का बजट प्रस्तुत किया जाएगा। सत्र के दौरान बजट पर विस्तृत चर्चा, कट मोशन (कटौती प्रस्ताव) पर विचार-विमर्श और अंत में मतदान की प्रक्रिया के माध्यम से बजट को पारित किया जाएगा।
विधायकों से सार्थक चर्चा की अपील
कुलदीप सिंह पठानिया ने सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के विधायकों से अपील की है कि वे इस सत्र का उपयोग प्रदेश के हित में करें। उन्होंने कहा कि सदन का समय बेहद कीमती होता है, इसलिए सत्र के दौरान हंगामा करने की बजाय सार्थक और सकारात्मक चर्चा की जानी चाहिए। विधायकों को जनहित और प्रदेश के विकास से जुड़े अधिक से अधिक मुद्दों को प्रमुखता से उठाना चाहिए ताकि जनता की समस्याओं का समाधान हो सके।
युद्ध की वजह से टूट सकती है सप्लाई चेन
पत्रकार वार्ता के दौरान विधानसभा अध्यक्ष ने केवल प्रदेश की राजनीति ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों पर भी बेबाकी से अपनी राय रखी। उन्होंने आशंका जताते हुए कहा कि ईरान और इजराइल के बीच चल रहे युद्ध का सीधा प्रभाव भारत के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश पर भी पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि युद्ध की वजह से सप्लाई चेन टूट सकती है, जिससे रसोई गैस, पेट्रोल और डीजल जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा है। अगर ऐसा होता है, तो इसका सीधा और नकारात्मक असर आम जनता की जेब, प्रदेश के पर्यटनऔर व्यावसायिक गतिविधियों पर पड़ेगा।
सरकारों को अभी से बनानी होगी रणनीति
इस संभावित संकट को लेकर स्पीकर पठानिया ने कहा कि प्रदेश और केंद्र सरकार को स्थिति की गंभीरता को समझना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि समय रहते एक दूरगामी योजना और विकल्प तैयार किए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में अगर ईंधन या आवश्यक वस्तुओं का संकट पैदा होता है, तो हिमाचल की जनता और अर्थव्यवस्था को कम से कम नुक्सान हो।
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