Edited By Jyoti M, Updated: 25 Mar, 2026 02:29 PM

हिमाचल प्रदेश में आगामी पंचायत चुनावों का बिगुल बजने से पहले, सत्ता के विकेंद्रीकरण की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया—'आरक्षण'—को अंतिम रूप देने की तैयारी शुरू हो गई है। देवभूमि के गांवों में सत्ता की बागडोर किसके हाथ होगी, इसका फैसला करने वाला 'आरक्षण...
हिमाचल डेस्क। हिमाचल प्रदेश में आगामी पंचायत चुनावों का बिगुल बजने से पहले, सत्ता के विकेंद्रीकरण की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया—'आरक्षण'—को अंतिम रूप देने की तैयारी शुरू हो गई है। देवभूमि के गांवों में सत्ता की बागडोर किसके हाथ होगी, इसका फैसला करने वाला 'आरक्षण रोस्टर' अब अपने आखिरी पड़ाव पर है। प्रशासन यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि सीटों का यह बंटवारा पूरी तरह पारदर्शी हो और इसमें किसी भी तरह की तकनीकी चूक की गुंजाइश न रहे।
डेटा की बारीकी से जांच:
पंचायती राज निदेशालय ने प्रदेश के सभी ज़िला कलेक्टरों (DCs) को सख्त हिदायत दी है कि ग्राम स्तर से लेकर ज़िला परिषद तक के पदों के लिए तय किए गए आरक्षण का पूरा ब्योरा तुरंत पेश किया जाए। इस बार विभाग सिर्फ कागजी रिपोर्ट पर भरोसा नहीं कर रहा, बल्कि हर एक आंकड़े की गहराई से पड़ताल (Random Checking) करने के मूड में है। सभी जिलों को 26 मार्च, 2026 तक आरक्षण से संबंधित एक्सेल शीट और गणना पत्र (Calculation Sheet) निदेशालय को सौंपने होंगे।
आरक्षण की विधिवत अधिसूचना जारी करने के लिए 31 मार्च, 2026 की समयसीमा तय की गई है। गड़बड़ी रोकने के लिए विभाग ने निर्देश दिए हैं कि हार्ड कॉपी के प्रत्येक पन्ने पर संबंधित अधिकारी के हस्ताक्षर होने अनिवार्य हैं। गणना पत्र (कैलकुलेशन शीट) को इसलिए मंगवाया गया है ताकि यह देखा जा सके कि रोस्टर नियमों के अनुरूप बनाया गया है या नहीं।
पारदर्शिता पर विशेष ज़ोर
विभाग ने इस पूरे मिशन को 'टॉप प्रायोरिटी' (सर्वाधिक प्राथमिकता) की श्रेणी में रखा है। इस कवायद का मुख्य उद्देश्य यह है कि जब चुनाव हों, तो आरक्षण को लेकर किसी भी तरह का विवाद या कानूनी अड़चन पैदा न हो। पंचायत समितियों और जिला परिषदों के वार्डों से लेकर प्रधानों के पदों तक, हर सीट का गणित अब शिमला में बैठे उच्च अधिकारियों की पैनी नजर से होकर गुज़रेगा।