Shimla: पैंशनर्ज का सरकार को अल्टीमेटम, मांगें न मानीं तो 30 मार्च को होगा विधानसभा का घेराव

Edited By Kuldeep, Updated: 18 Mar, 2026 07:22 PM

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प्रदेश पैंशनर्ज संयुक्त संघर्ष समिति ने राज्य सरकार द्वारा सलाहकारों और बोर्ड-निगमों के अध्यक्षों-उपाध्यक्षों के कैबिनेट रैंक वापस लेने तथा उनके वेतन में 20 फीसदी कटौती के निर्णय का स्वागत किया है।

शिमला (संतोष): प्रदेश पैंशनर्ज संयुक्त संघर्ष समिति ने राज्य सरकार द्वारा सलाहकारों और बोर्ड-निगमों के अध्यक्षों-उपाध्यक्षों के कैबिनेट रैंक वापस लेने तथा उनके वेतन में 20 फीसदी कटौती के निर्णय का स्वागत किया है। हालांकि, समिति ने इसे देर से उठाया गया मजबूरी का कदम करार देते हुए सरकार को और कड़े फैसले लेने की सलाह दी है।
मित्र मंडली को खुश करने से हुआ खजाने का नुक्सान

संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आखिरकार यह स्वीकार कर लिया है कि सलाहकारों और चेयरमैनों की नियुक्तियों से सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ा था। उन्होंने कहा कि ये नियुक्तियां केवल मित्र मंडली को खुश करने के लिए की गई थीं, जिससे प्रदेश की आर्थिक स्थिति और खराब हुई है। सरकार को चाहिए कि आर्थिक सुधार के लिए इन सभी पदों को तुरंत प्रभाव से समाप्त कर दिया जाए।

वेतन बंद कर केवल मानदेय देने की मांग
सुरेश ठाकुर ने आर्थिक सुधार के लिए बड़े सुझाव देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधानसभा अध्यक्ष और विधायकों के वेतन-भत्ते बंद कर दिए जाने चाहिए। समाज सेवा के बदले उन्हें केवल मानदेय दिया जाना चाहिए। साथ ही, विभिन्न विभागों और बोर्ड-निगमों में अधिकारियों को दिए गए सेवा विस्तार को भी तुरंत बंद करने की मांग उठाई गई है।

21 मार्च के बजट से उम्मीदें, वरना 30 मार्च को बड़ा आंदोलन
पैंशनर्स समिति ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि 21 मार्च को पेश होने वाले वर्ष 2026-27 के बजट में पैंशनरों और कर्मचारियों की लंबित देनदारियों (एरियर एवं डी.ए.) के लिए पर्याप्त बजट का प्रावधान किया जाए। समिति के 18 संगठनों द्वारा सौंपे गए 14 सूत्रीय मांगपत्र पर जल्द सकारात्मक निर्णय लिया जाए।

अभी तो सिर्फ ट्रेलर है, पूरी पिक्चर बाकी है
सुरेश ठाकुर ने चेतावनी देते हुए कहा कि हाल ही में प्रदेश के 12 जिलों में भारी बारिश के बावजूद पैंशनरों ने सड़कों पर उतरकर जो प्रदर्शन किया, वह महज एक ट्रेलर था। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने हमारे शिष्टमंडल को वार्ता के लिए नहीं बुलाया और मांगों का समाधान नहीं किया, तो 30 मार्च को शिमला में राज्य स्तरीय विशाल धरना-प्रदर्शन होगा और विधानसभा का घेराव किया जाएगा। इसके बाद जेल भरो आंदोलन शुरू होगा।

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