Edited By Swati Sharma, Updated: 23 Jan, 2026 12:22 PM

Himachal Panchayat Chunav : हिमाचल प्रदेश में आगामी पंचायत चुनाव 2026 से पहले स्थानीय लोकतंत्र की बदलती तस्वीर सामने आई है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के एक शोध में खुलासा हुआ है कि पंचायत चुनाव 2020-21 में निर्वाचित प्रतिनिधियों में 21 से 40 वर्ष...
Himachal Panchayat Chunav : हिमाचल प्रदेश में आगामी पंचायत चुनाव 2026 से पहले स्थानीय लोकतंत्र की बदलती तस्वीर सामने आई है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के एक शोध में खुलासा हुआ है कि पंचायत चुनाव 2020-21 में निर्वाचित प्रतिनिधियों में 21 से 40 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की हिस्सेदारी 72.04 प्रतिशत रही। यह दर्शाता है कि पंचायतों में नेतृत्व का केंद्र अब वरिष्ठ वर्ग से हटकर तेजी से युवाओं की ओर स्थानांतरित हो रहा है।
शोध के मुताबिक, राज्यभर में पंचायत चुनावों के दौरान कुल 97,502 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था। नामांकन वापसी के बाद 78,072 उम्मीदवार चुनाव मैदान में बचे, जिनमें से 26,727 उम्मीदवार विभिन्न पंचायत पदों पर निर्वाचित हुए। इनमें 21 से 30 वर्ष आयु वर्ग के 9,223 प्रतिनिधि चुने गए, जो कुल निर्वाचित प्रतिनिधियों का 34.51 प्रतिशत है। वहीं 31 से 40 वर्ष आयु वर्ग के 10,030 प्रतिनिधियों की भागीदारी 37.53 प्रतिशत दर्ज की गई।
'पंचायतों में नेतृत्व का चेहरा अब लगातार युवा होता जा रहा'
इसके विपरीत 41 से 50 वर्ष आयु वर्ग के 5,105 प्रतिनिधि निर्वाचित हुए, जिनकी हिस्सेदारी 19.10 प्रतिशत रही। 51 से 60 वर्ष आयु वर्ग से 1,981 प्रतिनिधि (7.41 प्रतिशत) और 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग से केवल 388 प्रतिनिधि (1.45 प्रतिशत) निर्वाचित हुए। ये आंकड़े स्पष्ट संकेत देते हैं कि पंचायतों में नेतृत्व का चेहरा अब लगातार युवा होता जा रहा है। पंचायत चुनावों में महिलाओं की मजबूत उपस्थिति ने पंचायत व्यवस्था के सामाजिक संतुलन को नया आयाम दिया है। अध्ययन में यह भी सामने आया है कि निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों का शैक्षणिक स्तर पहले की तुलना में बेहतर हुआ है। कुल निर्वाचित प्रतिनिधियों में 46.40 प्रतिशत मैट्रिक पास हैं, जबकि 24.80 प्रतिशत मैट्रिक से कम शिक्षित हैं। गैर-साक्षर प्रतिनिधियों की हिस्सेदारी केवल 1.90 प्रतिशत रही।
मध्यम और निम्न आय वर्ग के हाथों में पंचायत नेतृत्व
आर्थिक स्थिति के विश्लेषण में पाया गया कि 81.65 प्रतिशत निर्वाचित प्रतिनिधि एपीएल वर्ग से संबंधित हैं। बीपीएल वर्ग से 10 प्रतिशत, गैर-करदाता वर्ग से 7.37 प्रतिशत और मात्र 0.98 प्रतिशत प्रतिनिधि करदाता वर्ग से निर्वाचित हुए। इससे यह स्पष्ट होता है कि पंचायत नेतृत्व मुख्य रूप से मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों के हाथों में केंद्रित है। इस अध्ययन के लेखक और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के ग्रामीण विकास विभाग में कार्यरत डॉ. बलदेव सिंह नेगी ने बताया कि यह शोध पूरी तरह सरकारी आंकड़ों पर आधारित है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि पंचायतों में केवल भागीदारी ही नहीं, बल्कि निर्वाचित प्रतिनिधियों के प्रदर्शन और कार्यक्षमता का भी गंभीर मूल्यांकन किया जाए।