Himachal: सीजन से पहले बागवानों को बड़ा झटका... अब महंगा मिलेगा सेब कार्टन

Edited By Jyoti M, Updated: 18 Mar, 2026 11:22 AM

himachal blow to orchardists apple cartons to become more expensive

हिमाचल के सेब उत्पादकों के लिए इस बार की फसल केवल कुदरत के मिजाज पर ही निर्भर नहीं है, बल्कि बाजार की बदलती हवाओं ने भी उनकी जेब पर हमला बोल दिया है। जहां एक तरफ बागवान लजीज सेब की उम्मीद लगाए बैठे हैं, वहीं दूसरी ओर उन सेबों को पैक करने वाले...

हिमाचल डेस्क। हिमाचल के सेब उत्पादकों के लिए इस बार की फसल केवल कुदरत के मिजाज पर ही निर्भर नहीं है, बल्कि बाजार की बदलती हवाओं ने भी उनकी जेब पर हमला बोल दिया है। जहां एक तरफ बागवान लजीज सेब की उम्मीद लगाए बैठे हैं, वहीं दूसरी ओर उन सेबों को पैक करने वाले डिब्बों (कार्टन) की कीमतों में लगी आग उनकी चिंताएं बढ़ाने वाली है।

संकट में गत्ता उद्योग: आखिर क्यों बढ़ रहे हैं दाम?

सोलन के औद्योगिक क्षेत्र बद्दी से आई ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश के सेब कार्टन उद्योग पर चौतरफा मार पड़ रही है। इस बार बागवानों को अपनी फसल पैक करने के लिए पिछले साल के मुकाबले 20% अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। इसके पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं। 

खाड़ी देशों में जारी संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के कारण कच्चे माल की सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई है।
गत्ता तैयार करने के लिए जरूरी 'वेस्ट पेपर' और उसे प्रोसेस करने वाले रसायनों (केमिकल्स) की कीमतों में 20 से 30 फीसदी का उछाल आया है। माल न केवल महंगा हुआ है, बल्कि उद्योगों तक पहुंचने में देरी भी हो रही है, जिससे उत्पादन ठप होने की कगार पर है।

वेंटिलेटर पर प्रदेश की इकाइयां

हिमाचल में करीब 250 से अधिक गत्ता इकाइयां इस आर्थिक संकट से जूझ रही हैं। उद्योग संघ के प्रतिनिधियों (हेमराज चौधरी, विशाल गोयल, अशोक राणा व अन्य) का स्पष्ट कहना है कि छोटे और मध्यम दर्जे के उद्योगों के लिए मौजूदा कीमतों पर काम करना नामुमकिन हो गया है। उनके अनुसार "गत्ता उद्योग पहले से ही नाजुक दौर से गुजर रहा था। अब कच्चे माल के बढ़े दामों ने इसे 'वेंटिलेटर' पर ला खड़ा किया है। अगर लागत के अनुपात में कार्टन के दाम नहीं बढ़ाए गए, तो फैक्ट्रियों में ताले लग जाएंगे।"

बागवानों और सरकार के लिए खतरे की घंटी

यदि सरकार ने इस मामले में तुरंत दखल नहीं दिया और कच्चे माल की कीमतों को नियंत्रित करने या सब्सिडी देने का कोई रास्ता नहीं निकाला, तो सेब सीजन के दौरान बागवानों पर सीधा आर्थिक बोझ पड़ेगा। पहले से ही खाद, कीटनाशक और ढुलाई की मार झेल रहे किसानों के लिए महंगा कार्टन मुनाफे को कम कर देगा।

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