Edited By Vijay, Updated: 21 Jan, 2026 03:12 PM

हिमाचल प्रदेश की प्रमुख जल संरचनाओं में शुमार गोबिंद सागर झील में पर्यावरणीय नियमों की धज्जियां उड़ाने का एक गंभीर मामला सामने आया है। लुहणू स्थित स्टेडियम के समीप दिनदहाड़े ट्रैक्टरों के माध्यम से अवैध रूप से झील में मिट्टी डंप की जा रही है।
बिलासपुर (बंशीधर): हिमाचल प्रदेश की प्रमुख जल संरचनाओं में शुमार गोबिंद सागर झील में पर्यावरणीय नियमों की धज्जियां उड़ाने का एक गंभीर मामला सामने आया है। लुहणू स्थित स्टेडियम के समीप दिनदहाड़े ट्रैक्टरों के माध्यम से अवैध रूप से झील में मिट्टी डंप की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि दिनदहाड़े चल रहे इस खेल की प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड काे भनक तक नहीं थी।
स्थानीय लोगों के मुताबिक ट्रैक्टर सीधे झील के किनारे पहुंच रहे हैं और मिट्टी को पानी में गिरा रहे हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस तरह की डंपिंग से झील में गाद की मात्रा तेजी से बढ़ रही है। इससे न केवल झील की जल धारण क्षमता कम होगी, बल्कि पानी की गुणवत्ता में भी भारी गिरावट आएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि गाद बढ़ने से पानी में ऑक्सीजन का स्तर घट सकता है, जिससे मछलियों की वृद्धि और प्रजनन प्रक्रिया पर घातक असर पड़ेगा।
यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि एक तरफ मत्स्य पालन विभाग झील में उत्पादन बढ़ाने के लिए 100 एमएम आकार का मछली बीज डाल रहा है, वहीं दूसरी तरफ मिट्टी की डंपिंग इन प्रयासों को विफल कर रही है। वर्तमान में झील में 44 मत्स्य सहकारी सभाएं कार्यरत हैं। इनसे करीब 2800 मछुआरे सीधे तौर पर जुड़े हैं। यदि मछलियों के प्राकृतिक आवास को नुक्सान पहुंचा तो इसका सीधा असर इन हजारों मछुआरों की आजीविका पर पड़ेगा और भविष्य में मत्स्य उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की जा सकती है।
स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों द्वारा मामला उठाए जाने के बाद प्रशासन हरकत में आया है। लोगों ने मांग की है कि इस अवैध गतिविधि पर तुरंत रोक लगाई जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो। हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बिलासपुर के क्षेत्रीय अधिकारी पवन शर्मा ने कहा कि मामला मेरे ध्यान में आया है। संबंधित स्थल का जल्द ही निरीक्षण किया जाएगा और जो भी लोग झील में मिट्टी डंप करते पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।