Himachal: 15 दिनों से गले में रेंग रहा था ये जिंदा कीड़ा, IGMC के डाॅक्टरों ने सिरमौर के मरीज को दिया जीवनदान

Edited By Vijay, Updated: 31 Jan, 2026 06:24 PM

doctors at igmc saved the life of patient from sirmaur

आईजीएमसी के डाॅक्टरों ने एक बार फिर अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया है। यहां सिरमौर के मरीज को डाॅक्टरों ने जीवनदान प्रदान किया है, जिसके गले से डाॅक्टरों की टीम ने जीवित जोंक निकालकर उसकी जान बचाई है।

शिमला (संतोष): आईजीएमसी के डाॅक्टरों ने एक बार फिर अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया है। यहां सिरमौर के मरीज को डाॅक्टरों ने जीवनदान प्रदान किया है, जिसके गले से डाॅक्टरों की टीम ने जीवित जोंक निकालकर उसकी जान बचाई है। जानकारी के अनुसार जिला सिरमौर के पच्छाद उपमंडल के गांव कंगर-धारयार निवासी 55 वर्षीय सुरेश को पिछले करीब 15 दिनों से गले में काेई वस्तु फंसी होने का अहसास और आवाज में बदलाव की शिकायत थी। प्रारंभिक जांच के लिए उन्हें एमएमयू सोलन में दिखाया गया, जहां डायरैक्ट लैरिंगोस्कोपी के दौरान गले में एक काले रंग की हिलती हुई वस्तु नजर आई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मरीज को तुरंत आईजीएमसी शिमला रैफर किया गया। आईजीएमसी में आपातकालीन फौरन बॉडी ऑप्रेशन किया गया, जिसमें मरीज के गले से जीवित काले रंग की जोंक को सफलतापूर्वक निकाल लिया गया।

ऑप्रेशन के बाद मरीज की हालत स्थिर
इस जटिल और दुर्लभ प्रक्रिया को ईएनटी विभाग की टीम ने कुशलता से अंजाम दिया। टीम का नेतृत्व डाॅ. डिंपल के. भगलानी (सहायक प्रोफैसर) ने किया। टीम में डाॅ. राघव निरूला (सीनियर रैजीडैंट), डाॅ. मयूर बग्गा (जूनियर रैजीडैंट), डाॅ. निशांत (जूनियर रैजीडैंट) और डाॅ. कुमार सौरव (जूनियर रैजीडैंट) शामिल रहे। ऑप्रेशन में तकनीकी सहयोग सुभाष बाली और अर्चना द्वारा दिया गया। डाॅक्टरों के अनुसार समय पर सही जांच और त्वरित उपचार से मरीज की जान बचाई जा सकी। ऑप्रेशन के बाद मरीज की हालत स्थिर बताई जा रही है। डाॅक्टरों ने ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक जलस्रोतों के उपयोग के दौरान विशेष सावधानी बरतने की भी सलाह दी है।

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