विधानसभा के बाहर गरजे आऊटसोर्स कर्मचारी, CM सुक्खू को सौंपा अल्टीमेटम, देखें क्या हैं 5 मुख्य मांगें

Edited By Vijay, Updated: 27 Mar, 2026 06:50 PM

demonstration of outsourced employees

हिमाचल प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में पिछले 10 से 15 वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे आऊटसोर्स कर्मचारियों के सब्र का बांध अब टूटने लगा है। अल्प वेतन और असुरक्षित भविष्य की मार झेल रहे इन कर्मचारियों ने शिमला के चौड़ा मैदान...

शिमला (संतोष): हिमाचल प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में पिछले 10 से 15 वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे आऊटसोर्स कर्मचारियों के सब्र का बांध अब टूटने लगा है। अल्प वेतन और असुरक्षित भविष्य की मार झेल रहे इन कर्मचारियों ने शिमला के चौड़ा मैदान (विधानसभा के बाहर) में एकत्रित होकर अपनी मांगों को लेकर जोरदार तरीके से आवाज बुलंद की। हिमाचल प्रदेश आउटसोर्स कर्मचारी यूनियन ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को एक औपचारिक मांग पत्र सौंपकर अपनी लंबित मांगों को जल्द पूरा करने की गुहार लगाई है।

अस्तित्व पर मंडरा रहा  संकट,  ठोस कदम नहीं उठाया तो  निर्णायक मोड़ लेगा संघर्ष
यूनियन ने सरकार को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि वे वर्षों से इस उम्मीद में डटे हैं कि एक दिन उन्हें नियमित किया जाएगा, लेकिन अब उनके सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है। यूनियन के संयोजक अश्वनी शर्मा और सह-संयोजक सोहन लाल तुलिया के हस्ताक्षरों वाले इस मांग पत्र के जरिए स्पष्ट किया गया है कि यदि सरकार ने जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो हजारों कर्मचारियों का यह संघर्ष एक निर्णायक मोड़ ले लेगा।

आऊटसोर्स कर्मचारियों की 5 प्रमुख मांगें
नौकरी की सुरक्षा: कर्मचारियों की सेवाओं में स्थायित्व सुनिश्चित किया जाए और बिना किसी ठोस कारण के किसी भी कर्मी को नौकरी से न निकाला जाए।
स्थायी नीति व समायोजन: आऊटसोर्स कर्मियों के लिए एक स्पष्ट और पारदर्शी नीति बनाई जाए, ताकि उन्हें उनके संबंधित विभागों में मर्ज (समायोजित) किया जा सके।
श्रम कानूनों की सख्ती से पालना: ठेकेदारों के माध्यम से काम कर रहे कर्मियों पर लेबर लॉ (श्रम कानून) सख्ती से लागू हो, जिससे उन्हें न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा मिल सके।
समान काम-समान वेतन: नियमित कर्मचारियों की तर्ज पर ही आऊटसोर्स कर्मियों को भी समान कार्य के लिए समान वेतन का लाभ दिया जाए।
दुर्घटना सहायता तुरंत लागू हो: 15 अक्तूबर को बिजली कर्मचारियों के अधिवेशन में मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा (दुर्घटना होने पर परिवार को सहायता राशि) को तुरंत प्रभाव से लागू किया जाए।

सीएम सुक्खू से मिला उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल
अपनी सेवाओं की सुरक्षा और एक स्थायी नीति की मांग को लेकर शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश आऊटसोर्स कर्मचारी यूनियन के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से सीधी मुलाकात की। अश्वनी शर्मा (संयोजक) और सोहन लाल तुलिया (सह-संयोजक) की अगुवाई में गए इस प्रतिनिधिमंडल में विभिन्न विभागों के आऊटसोर्स कर्मचारी नेता शामिल रहे। सीएम से मिलने वाले इस प्रतिनिधिमंडल में दिनेश कुमार व अनिला शर्मा, मीना देवी (विद्युत बोर्ड), संदीप चौहान (मिल्क फैडरेशन), अवधेश सरोच (एचपीपीटीसीएल), जगत राम (एचपीपीसीएल), रूप दास (स्वास्थ्य विभाग), पवन किल्टा (रोहड़ू) और देवेंद्र (एचआरटीसी) विशेष रूप से मौजूद रहे।

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