मंडी कोर्ट का बड़ा फैसला, पुलिस अफसर पर जानबूझकर गाड़ी चढ़ाने के दोषी को सुनाई ये सजा

Edited By Vijay, Updated: 12 Mar, 2026 04:08 PM

culprit sentenced for deliberately driving over police officer

ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारी पर जानलेवा हमला करने और उन्हें कुचलने के एक मामले में मंडी की एक विशेष अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने वर्ष 2019 की इस वारदात में आरोपी चेतन शर्मा....

मंडी (रजनीश): ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारी पर जानलेवा हमला करने और उन्हें कुचलने के एक मामले में मंडी की एक विशेष अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने वर्ष 2019 की इस वारदात में आरोपी चेतन शर्मा निवासी उरला पधर, जिला मंडी को दोषी करार देते हुए साढ़े 3 साल के साधारण कारावास और 3 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। दोषी को भारतीय दंड संहिता की धारा 333, 353 और 279 के तहत सजा दी गई है।

यह रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना 18 जुलाई, 2019 की रात करीब 8 बजे की है। अभियोजन पक्ष के अनुसार बल्ह पुलिस थाना में तैनात प्रोबेशनरी सब-इंस्पेक्टर (PSI) जनेश्वर ठाकुर अपनी टीम के साथ लुणापानी के पास यातायात चैकिंग (नाका) कर रहे थे। इसी दौरान नेरचौक की ओर से आ रही एक पिकअप जीप को पुलिस ने रुकने का इशारा किया, लेकिन चालक (चेतन शर्मा) ने गाड़ी रोकने की बजाय रफ्तार बढ़ा दी और मंडी की ओर भाग निकला। संदेह होने पर पीएसआई जनेश्वर ठाकुर ने हार नहीं मानी और तुरंत वहां से गुजर रही एक निजी कार में लिफ्ट लेकर उस जीप का पीछा करना शुरू कर दिया।

कुछ दूरी पर बगला पैट्रोल पंप पर वह जीप तेल भरवाने के लिए रुकी। पीएसआई जनेश्वर ठाकुर गाड़ी से उतरे और चालक से पूछताछ करने के लिए जैसे ही उसके दरवाजे के पास पहुंचे, आरोपी चेतन शर्मा ने जानबूझकर अपनी जीप को तेजी से रिवर्स (बैक) किया और पुलिस अधिकारी के ऊपर चढ़ा दिया। इस जानलेवा हमले में पीएसआई ठाकुर की टांग में गंभीर फ्रैक्चर आ गया था और वे बुरी तरह घायल हो गए थे।

सीसीटीवी  फुटेज और 16 गवाहों ने पहुंचाया सलाखों के पीछे
इस मामले को सुलझाने और दोषी को सजा दिलाने में वैज्ञानिक और दस्तावेजी साक्ष्यों ने अहम भूमिका निभाई। अभियोजन पक्ष ने अदालत में कुल 16 गवाह पेश किए। अदालत में सबसे बड़ा और पुख्ता सबूत पैट्रोल पंप पर लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज साबित हुई, जिसमें पूरी वारदात कैद हो गई थी। इसके अलावा पैट्रोल पंप के सेल्समैन और उस निजी कार के चालक (जिसकी मदद से पुलिस ने पीछा किया था) ने भी अदालत में आरोपी की पहचान की और घटना की आंखों देखी गवाही दी। इन सभी ठोस सबूतों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए यह सजा सुनाई है।

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