Edited By Jyoti M, Updated: 10 Jan, 2026 12:21 PM

राजधानी में विकास और विनाश के बीच की लकीर एक बार फिर धुंधली पड़ गई है। भट्टाकुफर के जख्म अभी भरे भी नहीं थे कि चलौंठी में एक छह मंजिला इमारत पर आए खतरे ने विकास के दावों की पोल खोल दी है।
शिमला। राजधानी में विकास और विनाश के बीच की लकीर एक बार फिर धुंधली पड़ गई है। भट्टाकुफर के जख्म अभी भरे भी नहीं थे कि चलौंठी में एक छह मंजिला इमारत पर आए खतरे ने विकास के दावों की पोल खोल दी है। जिस टनल को यातायात सुगम करने के लिए बनाया जा रहा है, वही अब रिहायशी घरों के लिए काल साबित हो रही है। शुक्रवार की हाड़ कंपा देने वाली ठंड में 15 परिवारों को अपना आशियाना छोड़ खुले आसमान के नीचे रात काटनी पड़ी।
चेतावनी को किया दरकिनार, अब मंडराया खतरा
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि यह आपदा अचानक नहीं आई। पिछले तीन दिनों से अनंतराम नामक व्यक्ति के इस छह मंजिला भवन में दरारें दिखने लगी थीं। प्रभावितों ने समय रहते फोरलेन निर्माता कंपनी और प्रशासन को आगाह किया था, लेकिन विशेषज्ञों ने मौके का मुआयना कर इसे 'खतरे से बाहर' बताकर पल्ला झाड़ लिया। शुक्रवार रात जब दरारें चौड़ी होने लगीं और जमीन धंसने का डर बढ़ा, तब जाकर प्रशासन की नींद खुली।
आधी रात का रेस्क्यू और प्रशासन पर भड़का आक्रोश
रात के करीब 10 बजे जब शहर सोने की तैयारी कर रहा था, तब पुलिस और कंपनी के कारिंदों ने आनन-फानन में मकान खाली करने का फरमान सुना दिया। आलम यह था कि छोटे बच्चे और बुजुर्ग कड़ाके की ठंड में ढली-संजौली बाईपास पर बैठने को मजबूर हो गए।
सड़क पर रात: रहने की कोई वैकल्पिक व्यवस्था न होने के कारण लोगों ने सड़क किनारे आग जलाकर ठंड से बचने की कोशिश की।
प्रशासनिक देरी: लोग इस बात से नाराज थे कि शिकायत के बावजूद कार्रवाई तब हुई जब सिर पर खतरा आ गया। एडीएम पंकज शर्मा ने देर रात 11 बजे मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला, लेकिन तब तक लोगों का सब्र जवाब दे चुका था।
सुरक्षा के घेरे में बाईपास
मकान की स्थिति और सड़क पर उभरी दरारों को देखते हुए प्रशासन ने ढली-संजौली बाईपास को वाहनों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया है। सुरक्षा की दृष्टि से वहां पुलिस बल तैनात है।
बड़े खतरे की आहट
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल एक मकान का मामला नहीं है। टनल निर्माण के दौरान हो रही भारी कंपन और खुदाई से पूरे चलौंठी क्षेत्र के अन्य मकानों की नींव भी हिल रही है। यदि निर्माण तकनीक में सुधार नहीं किया गया, तो भविष्य में कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है।