चैक बाऊंस के दोषी को 1 साल की कैद व 5.70 लाख का जुर्माना

Edited By Vijay, Updated: 21 Oct, 2019 11:39 PM

court gave punishment to accused in cheque bounce case

चैक बाऊंस के एक मामले में दायर अपीलों पर फैसला सुनाते हुए अदालत ने आरोपी को एक साल के साधारण कारावास और 5.70 लाख रुपए जुर्माना अदा करने का फैसला सुनाया है। आरोपी से प्राप्त जुर्माना राशि को शिकायतकर्ता के पक्ष में बतौर हर्जाना अदा किया जाएगा।

मंडी: चैक बाऊंस के एक मामले में दायर अपीलों पर फैसला सुनाते हुए अदालत ने आरोपी को एक साल के साधारण कारावास और 5.70 लाख रुपए जुर्माना अदा करने का फैसला सुनाया है। आरोपी से प्राप्त जुर्माना राशि को शिकायतकर्ता के पक्ष में बतौर हर्जाना अदा किया जाएगा। इसके अलावा अदालत ने आरोपी की अपील को निरस्त करते हुए निचली अदालत के सजा के फैसले को भी बरकरार रखा है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश आर.के. शर्मा की अपीलीय अदालत ने शिकायतकर्ता विपिन शर्मा और आरोपी ज्ञान चंद की ओर से दायर अपीलों की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता की अपील को स्वीकार किया है जबकि आरोपी की अपील को खारिज कर दिया है।

उल्लेखनीय है कि विशेष न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय ने औट तहसील के टकोली पनारसा गांव के विपिन शर्मा की शिकायत पर चलाए गए अभियोग के साबित होने पर ज्ञान चंद को एक साल के साधारण कारावास और 4,70,000 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई थी। इस फैसले को दोनों पक्षों की ओर से अपील दायर करके चुनौती दी गई थी। आरोपी का कहना था कि निचली अदालत ने सही तरीके से फैसला नहीं किया है और एक गलत फैसले के तहत उन्हें सजा दी गई है जबकि दूसरे पक्ष शिकायतकर्ता ने निचली अदालत के फैसले को सही करार देते हुए हर्जाने की राशि को संशोधित करने की अपील की थी। 

अधिवक्ता आरके चावला के माध्यम से दायर की गई अपील में शिकायतकर्ता का कहना था कि निचली अदालत ने हालांकि आरोपी को 4,70,000 रुपए जुर्माना अदा करने को कहा है लेकिन यह जुर्माना नैगोशिएबल इन्स्ट्रूमैंट अधिनियम के प्रावधानों के तहत नहीं किया गया है। इसके अलावा निचली अदालत ने अपने फैसले में ये निर्देश नहीं दिए हैं कि आरोपी से प्राप्त जुर्माना राशि को बतौर हर्जाना शिकायतकर्ता के पक्ष में अदा किया जाएगा।

अदालत ने शिकायतकर्ता की अपील को स्वीकारते हुए जुर्माना राशि को 4,70,000 से बढ़ाते हुए 5.70 लाख रुपए करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने आरोपी से प्राप्त होने वाली इस जुर्माना राशि को बतौर हर्जाना शिकायतकर्ता के पक्ष में अदा करने के भी निर्देश दिए हैं। अदालत ने निचली अदालत में आरोपी को सुनाई गई सजा को निरस्त करने की अपील को भी खारिज करने के आदेश दिए हैं। 

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