Edited By Swati Sharma, Updated: 24 Feb, 2026 04:11 PM

Shimla News: हिमाचल प्रदेश सरकार वित्त वर्ष 2026-27 के बजट से पहले बढ़ते राजकोषीय दबाव को देखते हुए अपने आंतरिक संसाधनों को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इसी कड़ी में, राज्य कर एवं आबकारी विभाग ने केंद्रीय बिक्री कर (हिमाचल प्रदेश) नियम, 1970...
Shimla News: हिमाचल प्रदेश सरकार वित्त वर्ष 2026-27 के बजट से पहले बढ़ते राजकोषीय दबाव को देखते हुए अपने आंतरिक संसाधनों को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इसी कड़ी में, राज्य कर एवं आबकारी विभाग ने केंद्रीय बिक्री कर (हिमाचल प्रदेश) नियम, 1970 में संशोधन कर सी-फॉर्म जमा करने के नियमों को कड़ा कर दिया है। नये प्रावधानों के तहत, अब करदाताओं को सी-फॉर्म देर से जमा करने पर भारी जुर्माना भरना होगा।
अब तय समय सीमा के बाद जुर्माना अनिवार्य
हिमाचल प्रदेश में स्थित उद्योगों के अधिकांश उपभोक्ता राज्य के बाहर हैं, इसलिए फॉर्म जमा करने में देरी से राजस्व वसूली प्रभावित हो रही है। नये नियम के अनुसार, व्यवसाई अब घोषणा पत्र या प्रमाण पत्र जारी होने की तारीख से छह महीने के भीतर लेनदेन की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। अगर कोई कारोबारी छह महीने की अवधि बीत जाने के बाद ऑनलाइन आवेदन करता है, तो उसे नये फॉर्म के मूल्य का 0.1 प्रतिशत या कम से कम 50,000 रुपये (दोनों में से जो भी अधिक हो) का जुर्माना देना होगा। जुर्माना लगाने से पहले संबंधित प्राधिकरण आवेदक को सुनवाई का अवसर प्रदान करेगा। पेनाल्टी के भुगतान के बाद ही पुराने फॉर्म रद्द कर नए फॉर्म जारी करने की सिफारिश की जाएगी।
राजस्व बढ़ाने की तैयारी
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा में कहा कि बड़ी संख्या में उद्योग होने के बावजूद हिमाचल की आय कम रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की व्यवस्था मुख्य रूप से उपभोग-आधारित है, जिसके कारण उत्पादक राज्यों को नुकसान होता है। केंद्र के जीएसटी मुआवजे की समाप्ति और अनुदान के बंद करने से राज्य की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ा है। यह संशोधन न केवल कर निर्धारण में आने वाली जटिलताओं को दूर करेगा, बल्कि उद्योगों को समय पर अनुपालन के लिए भी प्रोत्साहित करेगा।