चम्बा में डीसी कार्यालय के बाहर CITU का धरना-प्रदर्शन, सरकार के खिलाफ नारेबाजी

Edited By Vijay, Updated: 15 Mar, 2023 11:39 PM

citu in chamba

सीटू ने राज्य कमेटी के आह्वान पर डीसी कार्यालय चम्बा के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन में हाइड्रो प्रोजैक्ट, आंगनबाड़ी, मिड-डे मील, वन विभाग दैनिकभोगी, मनरेगा मजदूर व यूनियन शामिल रहे।

चम्बा (काकू): सीटू ने राज्य कमेटी के आह्वान पर डीसी कार्यालय चम्बा के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन में हाइड्रो प्रोजैक्ट, आंगनबाड़ी, मिड-डे मील, वन विभाग दैनिकभोगी, मनरेगा मजदूर व यूनियन शामिल रहे। सीटू जिला अध्यक्ष नरेंद्र ने कहा कि ठेका व्यवस्था ने मजदूरों को बंधुआ मजदूर बना दिया है। चम्बा में हाईड्रो प्रोजैक्ट में ठेकेदार की मनमानी से मजदूरों की लूट चली है। 15 साल से अधिक समय से काम कर रहे स्कीम वर्कर आंगनबाड़ी, मिड-डे मील, आशा वर्कर को कोई भी सामाजिक सुरक्षा और पैंशन की व्यवस्था नहीं है न ही न्यूनतम वेतन दिया जाता है। इसलिए इन्हें सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए और पैंशन की व्यवस्था की जाए। 

निर्माण में काम करने वाले मजदूरों को कल्याण बोर्ड से मिलने वाले लाभ को रोक दिया गया है। इससे मजदूरों को मिलने वाले लाभ जैसे इंडक्शन, टिफिन, वाशिंग मशीन व साइकिल आदि को शुरू किया जाए। मनरेगा वर्कर को जो बोर्ड से बाहर निकालने का सरकार का फैसला लिया गया है वह मजदूर विरोधी है। मनरेगा में काम करने वाला व्यक्ति भी निर्माण का मजदूर है। इसलिए मनरेगा वर्कर को बोर्ड से न हटाया जाए। मनरेगा में काम कर रहे मजदूरों के 100 दिन पूरे नहीं लग रहे थे। अब केंद्र सरकार ने बजट में कटौती कर दी जिसके दुष्परिणाम आने वाले समय में ग्रामीण क्षेत्र में दिखेंगे। इसलिए इस तरह से बजट में कटौती करना सरकार को जनता के प्रति नियत को दर्शाता है। 

उन्होंने कहा कि सरकार आऊटसोर्स जैसी नीति लाकर सरकारी संस्थाओं को कमजोर कर रही है। आऊटसोर्स सिर्फ ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने व मजदूरों के शोषण का ही एक तरीका है। चम्बा जिला में वन विभाग के तहत काम करने वाले मजदूर जिनमें अधिकतर गरीब घरों से संबंध रखने वाले हैं इस नीति का सबसे ज्यादा शिकार हो रहे हैं। इन मजदूरों की दशा यह है कि एक एक साल से वेतन नहीं मिला। विभाग के पास न तो इनका कोई रिकॉर्ड है और न ही इनके लिए मस्ट्रोल जारी किया जाता है। सरकार जल्द ही इनकी स्थिति में सुधार नहीं करती है तो पूरे जिले के वन विभाग दैनिक वेतन भोगी मजदूरों को संघर्ष का रास्ता अपनाना पड़ेगा। नरेंद्र कुमार ने कहा कि देश के नौरतन कंपनी एनएचपीसी बैरा स्यूल में जहां ठेकेदार ने मनमर्जी से रिलीवर के नाम पर अतिरिक्त व्यक्ति को अन्य मजदूरों के वेतन के सहारे रखा है जिसमें पहले से काम कर रहे वर्कर के वेतन से पैसा काट कर उस व्यक्ति को दिया जाएगा।

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