Edited By Jyoti M, Updated: 30 Jan, 2026 03:10 PM

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के प्रारूप में बदलाव और इसके नाम से 'महात्मा गांधी' का नाम हटाए जाने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है।
हिमाचल डेस्क। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के प्रारूप में बदलाव और इसके नाम से 'महात्मा गांधी' का नाम हटाए जाने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। इस मुद्दे पर अपना विरोध दर्ज कराने के लिए शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री सहित कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान पर महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष दो घंटे का सामूहिक उपवास किया।
शीर्ष नेतृत्व की उपस्थिति और केंद्र पर प्रहार
इस 'मनरेगा संग्राम' में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार, प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल और दोनों सह-प्रभारियों सहित कई कैबिनेट मंत्री शामिल हुए। इस उपवास के दौरान नेताओं ने केंद्र सरकार पर तीखे हमले किए। मुख्यमंत्री और अन्य नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र की वर्तमान नीतियों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ टूट रही है और गरीबों के हितों की अनदेखी की जा रही है।
"योजना की आत्मा पर प्रहार"
प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि मनरेगा न केवल रोजगार का साधन है, बल्कि ग्रामीण भारत की आजीविका की गारंटी है। उन्होंने कहा:
नाम में बदलाव: गांधी जी का नाम हटाना योजना की मूल भावना और 'आत्मा' को समाप्त करने जैसा है।
प्रक्रिया पर सवाल: आरोप लगाया गया कि प्रधानमंत्री कार्यालय के दबाव में बिना केंद्रीय कैबिनेट को विश्वास में लिए यह फैसला लिया गया।
रोजगार संकट: योजना के स्वरूप में बदलाव से ग्रामीणों को मिलने वाले 100 दिन के सुनिश्चित रोजगार पर संकट मंडरा रहा है।
देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल हिमाचल तक सीमित नहीं है, बल्कि पिछले दो सप्ताह से पूरे देश में चलाया जा रहा है। विनय कुमार ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने मनरेगा के मूल स्वरूप और नाम को तत्काल बहाल नहीं किया, तो कांग्रेस अपने इस संघर्ष को और अधिक उग्र करेगी।