Chamba: अपने वाहन भरमौर में छोड़कर 50 किलोमीटर पैदल चल कर पठानकोट पहुंचे यात्री

Edited By Kuldeep, Updated: 31 Aug, 2025 10:05 PM

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मणिमहेश यात्रा के दौरान मूसलाधार बारिश के कारण भरमौर में फंसे पठानकोट के श्रद्धालु रविवार को सकुशल घर पहुंच गए हैं।

पठानकोट/चम्बा (मनिन्द्र/काकू): मणिमहेश यात्रा के दौरान मूसलाधार बारिश के कारण भरमौर में फंसे पठानकोट के श्रद्धालु रविवार को सकुशल घर पहुंच गए हैं। उन्होंने बताया कि बारिश के कारण पठानकोट-भरमौर राष्ट्रीय राजमार्ग कई जगहों से पूरी तरह से ध्वस्त व बंद हो गया है, जिसके कारण मणिमहेश यात्रा पर गए भारी संख्या में श्रद्धालु रास्ते में फंस गए जो अभी थोड़े-थोड़े करके श्रद्धालु अपनी वाहनों को वहीं रास्तों में छोड़कर कठिन रास्तों से पैदल चलकर चम्बा के कलसुईं गांव तक पहुंचकर हिमाचल प्रशासन द्वारा पठानकोट तक चलाई गई नि:शुल्क बसों से अपने घरों तक पहुंच रहे हैं। इसी दौरान यात्रियों को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा, वहीं यात्रियों से कई लोगों ने रहने के लिए दोगुने दाम लिए तो वहीं भरमौर के लाहल गांव के लोगों ने आगे आकर फंसे यात्रियों की नि:स्वार्थ सेवा की।

इसी कड़ी में पठानकोट से यात्रा पर गए शिव शक्ति अम्बा मंदिर कानपुर के पुजारी शक्ति पंडित, मंजीत सिंह, दिवांश सिंह, नीरज शर्मा, सुशांत शर्मा, लक्ष्मी शर्मा, मानव शर्मा आदि ने आज वापस अपने घर पठानकोट लौटने पर उन्होंने बताया कि वह लोग 23 अगस्त को मणिमहेश की यात्रा के लिए अपने घर से गए थे, यहां पर वह 2 दिन हड़सर में लगे लंगरों में रुके तथा उसके बाद जब वह वापस अपने घरों की ओर वापस लौटने लगे तो भारी बारिश के कारण भरमौर से 10 किलोमीटर आने के बाद लाहल गांव के नजदीक भारी लैंड स्लाइडिंग के कारण वहीं पर फंस गए। उन्होंने बताया कि वहां फंसे श्रद्धालुओं की लाहल गांव के लोगों ने बहुत मदद की तथा सड़क पर फंसे लोगों के लिए अपने घरों में रहने, खाने-पीने की निःशुल्क व्यवस्था की।

उन्होंने बताया कि वह वहां दो-तीन दिन फंसे रहे। यहां पर लाहल गांव के लोगों ने फंसे श्रद्धालुओं के लिए मिलकर तीनों समय के भोजन की बढ़िया व्यवस्था की तथा कुछ लोगों ने अपने घरों में लोगों को खाना बनाकर खिलाने के साथ सोने के लिए कम्बलों की व्यवस्था करके श्रद्धालुओं को मुश्किल नहीं आने दी। जिसके बाद जब यात्रा पर गए श्रद्धालुओं को पता चला कि 20 दिनों तक रास्ता खुलने की कोई उम्मीद नहीं है तब श्रद्धालुओं ने अपने वाहनों को वहीं छोड़कर पैदल वापस आने का फैसला लिया। उन्होंने बताया कि वह अपने वाहन लाहल गांव के लोगों के घरों में छोड़कर लगभग 50 किलोमीटर पैदल चलकर चम्बा के कलसुईं गांव तक पहुंचे, यहां से उन्हें प्रशासन द्वारा चलाई गई नि:शुल्क बसों में बैठाकर पठानकोट पहुंचाया गया।

उन्होंने बताया कि भरमौर से चम्बा तक पैदल यात्रा दौरान उन्हें बीच-बीच में लोकल लोगों द्वारा चलाए जा रहे वाहनों की मदद भी मिली जिसमें कुछ निःशुल्क सेवा तथा कुछ किराए वाले वाहन थे। उन्होंने बताया कि पैदल यात्रा दौरान बीच में पड़ते गांवों के लोगों द्वारा यात्रियों के लिए लंगर की व्यवस्था की गई थी, उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों ने उनकी बहुत मदद की, जिसके लिए वह उनका तह दिल से शुक्रिया अदा करते हैं। पठानकोट में वापस लौटे यात्रियों ने हिमाचल प्रशासन से लाहल (भरमौर) गांव के लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें प्रशंसा पत्र व उनके गांव के लिए स्पैशल पैकेज देने की मांग की ताकि वह लोग ऐसी आपदा आने पर लोगों की मदद करने के लिए कभी पीछे न हटें।

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