Edited By Vijay, Updated: 12 Feb, 2026 01:49 PM

केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश में रेल कनैक्टिविटी को सुदृढ़ करने और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए खजाना खोल दिया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र ने राज्य में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा कार्यों के लिए 2,716 करोड़ रुपए आबंटित किए हैं।
शिमला: केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश में रेल कनैक्टिविटी को सुदृढ़ करने और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए खजाना खोल दिया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र ने राज्य में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा कार्यों के लिए 2,716 करोड़ रुपए आबंटित किए हैं। यह आबंटन वर्ष 2009 से 2014 के दौरान (यूपीए सरकार के समय) मिले 108 करोड़ रुपए के औसत वार्षिक बजट की तुलना में 25 गुना से भी अधिक है।
केंद्रीय रेल मंत्री ने लोकसभा में दी जानकारी
यह महत्वपूर्ण जानकारी केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में सांझा की। वे हिमाचल प्रदेश से भाजपा सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज द्वारा पूछे गए एक अतारांकित प्रश्न का लिखित उत्तर दे रहे थे। डॉ. भारद्वाज ने राज्य में रेलवे लाइनों के विस्तार और स्टेशनों के पुनर्विकास की स्थिति को लेकर सवाल उठाया था।
3 बड़ी रेल परियोजनाओं पर काम जारी
रेल मंत्री ने सदन को सूचित किया कि 1 अप्रैल, 2025 की स्थिति के अनुसार राज्य में 214 किलोमीटर लंबी तीन नई रेलवे लाइन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनकी कुल लागत 17,622 करोड़ रुपए है। इन परियोजनाओं में से 64 किलोमीटर का हिस्सा कमीशन (शुरू) किया जा चुका है और मार्च 2025 तक कुल 8,280 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं।
दौलतपुर चौक और चंडीगढ़-बद्दी लाइन का स्टेटस
परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति बताते हुए मंत्रालय ने कहा कि नंगल बांध-ऊना-अंदौरा-दौलतपुर चौक सेक्शन (60 कि.मी.) का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इसके आगे दौलतपुर चौक से तलवाड़ा (52 किमी) खंड पर काम चल रहा है। इसके अलावा, औद्योगिक क्षेत्र को जोड़ने वाली चंडीगढ़-बद्दी नई रेलवे लाइन (28 कि.मी.), जिसे 1,540 करोड़ रुपए की लागत से मंजूर किया गया था, उस पर भी निर्माण कार्य प्रगति पर है।
भानुपल्ली-बिलासपुर लाइन पर अब तक 7,729 करोड़ रुपए खर्च
सामरिक रूप से महत्वपूर्ण भानुपल्ली-बिलासपुर-बेरी (63 कि.मी.) रेल लाइन परियोजना, जो केंद्र और हिमाचल सरकार के बीच 75:25 के लागत सांझाकरण मॉडल पर बन रही है, उस पर अब तक 7,729 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। रेल मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार को अपने हिस्से के 2,781 करोड़ रुपए देने थे, लेकिन अब तक केवल 847 करोड़ रुपए ही जमा हुए हैं। राज्य की ओर अभी भी 1,934 करोड़ रुपए बकाया हैं। इसके अतिरिक्त, जमीन अधिग्रहण की धीमी गति भी चिंता का विषय है। 124 हैक्टेयर आवश्यक भूमि के मुकाबले रेलवे को अब तक केवल 82 हैक्टेयर भूमि ही सौंपी गई है।
अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत 4 स्टेशनों का कायाकल्प
रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण के लिए चल रही अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत हिमाचल के चार स्टेशनों अंब अंदौरा, बैजनाथ-पपरोला, पालमपुर हिमाचल और शिमला को चिह्नित किया गया है। अंब अंदौरा और बैजनाथ-पपरोला में पुनर्विकास कार्य पूरे हो चुके हैं। वहीं, हैरिटेज महत्व वाले पालमपुर और शिमला स्टेशनों के लिए मास्टर प्लानिंग का काम चल रहा है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि वैधानिक मंजूरियों और अन्य प्रक्रियाओं के कारण फिलहाल परियोजनाओं के पूरा होने की कोई निश्चित समय सीमा तय नहीं की जा सकती है।