प्रशासन को ठेंगा, युवाओं ने खुद ही कर दिया ब्राहल खड्ड पर पुलिया का निर्माण

Edited By Vijay, Updated: 31 Jul, 2022 05:48 PM

youth themselves built the culvert on the brahal khadd

हम वो नहीं जो मुसीबतों से घबराकर हौसला तोड़ देते हैं, हम वो हैं जो मन में गर ठान लें तो हवाओं का रुख मोड़ देते हैं। कविता की यह पंक्तियां बोह क्षेत्र के मोरछ ब भंगार गढ़घून गांव के युवाओं पर सटीक बैठती हैं। युवाओं ने एकजुट होकर 2 दिन पहले ब्राहल खड्ड...

शाहपुर (पूजा): हम वो नहीं जो मुसीबतों से घबराकर हौसला तोड़ देते हैं, हम वो हैं जो मन में गर ठान लें तो हवाओं का रुख मोड़ देते हैं। कविता की यह पंक्तियां बोह क्षेत्र के मोरछ ब भंगार गढ़घून गांव के युवाओं पर सटीक बैठती हैं। युवाओं ने एकजुट होकर 2 दिन पहले ब्राहल खड्ड का पानी बढ़ने के कारण बही लकड़ी की पुलिया को फिर से बना लिया है। दरअसल मोरछ गांव के लोगों का अधिकांश खेत और दुधार ब्राहल खड्ड के दूसरे किनारे पर स्थित है। खेती और पशुपालन करना है तो खड्ड को पार कर जाना है परंतु दूसरे किनारे पर पहुंचने के लिए ब्राहल खड्ड में आज तक कोई पुल नहीं बन सका। यहां के किसानों की धान की फसल खड्ड के पार बोई जाती है। बरसात में खड्ड का जलस्तर बढ़ने पर पुली बह जाती है, जिससे यहां का संपर्क दूसरे छोर के गांव से टूट जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि हमारी समस्या कई दशकों से जस की तस बनी हुई है। जनप्रतिनिधियों की ओर से एक छोटा पुल बनवाने की मांग अक्सर की जाती है। इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। साल में 2 बार लकड़ी की पुली बनाकर समस्या का वैकल्पिक हल निकालना लोगों की मजबूरी बन गया है। बता दें कि भंगार, मोरछ, गढ़घून व स्पैडा की आबादी करीब हजार से ऊपर हैं।
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स्कूली बच्चों के लिए था मुश्किल भरा सफर
गांव के एक तरफ करीब 60 मकान हैं जबकि खड्ड के उस पार 100 से ज्यादा घर बने हैं। इन्हें ब्राहल खड्ड में ज्यादा पानी होने पर धान की फसल आदि के लिए जाने में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। बरसात के मौसम में क्लोटी में ऊपरी पहाड़ी कॉर्नर से अचानक लैंड स्लाइड हो जाता है जिस कारण स्कूल के बच्चे भी इस पुली को पार कर स्कूल के लिए वाया मोरछ से जाते हैं।

प्रशासन के ढुलमुल रवैया का शिकार हो रही जनता
हालांकि ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन से पुल बनवाने की मांग की, मगर कोई सार्थक पहल नहीं हुई। लोक निर्माण विभाग ने टैंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है यह बताकर पिछले कई सालों से आश्वासन के अलावा कुछ नहीं दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि मोरछ गांव को भंगार और गढ़घून ख़बरू महादेव व सैंकड़ों स्थानीय लोगों की धार को गांवों से जोड़ने के लिए और आवागामन आसान करने के लिए उनको एक पुल की जरूरत थी। प्रशासन के संज्ञान में भी यह बात कई बार लाई गई थी लेकिन कोई सुनने के लिए तैयार ही नहीं था। आखिरकार थक-हार कर आज फिर भरमानी युवा क्लब भंगार और चामुंडा युवा क्लब मोरछ के युवाओं ने मिलकर मिलकर लकड़ी से पुली तैयार कर सिस्टम को ठेंगा दिखा दिया। इसके ऊपर छोटे-छोटे लकड़ी के फट्टे लगा दिए गए है। अब इसी लकड़ी के पुली से आवागमन होता रहेगा। इसके बनने के बाद ग्रामीणों को काफी राहत मिली है। लोग अब अब इस पुली से अपने खेतों तक आसानी से आ-जा सकेंगे।

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