हिमकेयर योजना बंद करेगी सुक्खू सरकार, 1000 करोड़ घोटाले का दावा; विजिलेंस जांच के आदेश

Edited By Swati Sharma, Updated: 26 Mar, 2026 12:25 PM

the sukhu government will discontinue the himcare scheme

हिमाचल डेस्क :  हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बुधवार को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एक बड़ी घोषणा करते हुए पूर्व जयराम सरकार द्वारा शुरू की गई 'हिमकेयर' योजना को बंद करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने सदन में स्पष्ट किया कि...

हिमाचल डेस्क :  हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बुधवार को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एक बड़ी घोषणा करते हुए पूर्व जयराम सरकार द्वारा शुरू की गई 'हिमकेयर' योजना को बंद करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने सदन में स्पष्ट किया कि इस योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता का भारी अभाव रहा है, जिसके चलते अब सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक नई और बेहतर इंश्योरेंस पॉलिसी लेकर आएगी।

₹1000 करोड़ के खर्च पर उठे सवाल

मुख्यमंत्री सुक्खू ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि हिमकेयर योजना के तहत अब तक लगभग 1000 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन इस भारी भरकम राशि के उपयोग में भारी खामियां पाई गई हैं। उन्होंने कहा, "योजना के ऑडिट और निगरानी की कोई ठोस व्यवस्था नहीं थी। बजट का एक बड़ा हिस्सा बिना उचित पारदर्शिता के खर्च किया गया। वहीं, सरकार ने इन अनियमितताओं की तह तक जाने के लिए विजिलेंस जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।

नई व्यवस्था: ट्रेजरी के माध्यम से होगा भुगतान

मुख्यमंत्री ने पिछली व्यवस्था पर प्रहार करते हुए कहा कि रोगी कल्याण समिति (RKS) के माध्यम से होने वाले खर्च का ऑडिट करना मुश्किल था क्योंकि पैसा सीधे ट्रेजरी (खजाने) में नहीं जाता था। वहीं, हिम केयर के बदले सरकार एक नई इंश्योरेंस पॉलिसी लाएगा। नई नीति के तहत, सभी प्रकार के भुगतान अब सरकारी ट्रेजरी के माध्यम से होंगे। भ्रष्टाचार को रोकने के लिए जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी। स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए राशि का सीधा निवेश किया जाएगा।

रोबोटिक सर्जरी मशीन पर विपक्ष को चुनौती

सदन में रोबोटिक सर्जरी मशीनों की खरीद पर मचे बवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने एम्स (AIIMS) जैसी संस्थाओं से भी कम कीमत पर ये मशीनें खरीदी हैं। उन्होंने बताया कि पूरी मशीनरी की लागत लगभग 28 करोड़ रुपये है। सीएम ने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनके पास इससे सस्ती मशीनों का कोई विकल्प है, तो वे सरकार को उपलब्ध करवाएं।

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