Sujanpur Holi Festival: होली मेले की पहली शाम में मचा जबरदस्त गदर! बेकाबू हुई भीड़, पुलिस ने किया हल्का लाठीचार्ज

Edited By Jyoti M, Updated: 02 Mar, 2026 01:19 PM

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सुजानपुर के ऐतिहासिक मैदान में आयोजित राष्ट्रस्तरीय होली मेले का आगाज किसी रोमांचक फिल्म के क्लाइमेक्स जैसा रहा। जब सुरों के बादशाह बब्बू मान ने माइक संभाला, तो संगीत का ऐसा जादू चला कि मर्यादा की दीवारें ढह गईं।

हिमाचल डेस्क। हमीरपुर के सुजानपुर के ऐतिहासिक मैदान में आयोजित राष्ट्रस्तरीय होली मेले का आगाज किसी रोमांचक फिल्म के क्लाइमेक्स जैसा रहा। जब सुरों के बादशाह बब्बू मान ने माइक संभाला, तो संगीत का ऐसा जादू चला कि मर्यादा की दीवारें ढह गईं। हजारों की तादाद में उमड़े प्रशंसकों के जुनून को संभालने के लिए खाकी को काफी मशक्कत करनी पड़ी।

जब गीतों की गूँज बनी बेकाबू भीड़ की वजह

मेले की पहली शाम उस वक्त अराजकता में बदल गई जब रात के करीब 10:30 बजे पंजाबी गायकी के दिग्गज बब्बू मान मंच पर अवतरित हुए। जैसे ही उन्होंने अपनी कशिश भरी आवाज़ में सुर छेड़े, पंडाल में मौजूद युवाओं का जोश सातवें आसमान पर पहुँच गया।

अपने चहेते कलाकार को करीब से देखने की होड़ में दर्शक बैरिकेड्स लांघकर स्टेज की तरफ बढ़ने लगे।रात 11:45 बजे तक स्थिति इतनी संवेदनशील हो गई कि पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्का बल प्रयोग (लाठीचार्ज) करना पड़ा।

वीआईपी की मौजूदगी और सुरक्षा घेरा

हैरानी की बात यह रही कि यह सारा घटनाक्रम प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री और पुलिस अधीक्षक बलबीर सिंह ठाकुर की प्रत्यक्ष मौजूदगी में हुआ। एसपी खुद मोर्चे पर डटे रहे और बिगड़ते हालात को संभालने के लिए जवानों को निर्देश देते दिखे। हालांकि, प्रशासन ने राहत की सांस लेते हुए पुष्टि की कि समय रहते कार्रवाई करने से कोई बड़ी अनहोनी नहीं हुई और स्थिति पर काबू पा लिया गया।

'मित्रां दी छतरी' पर जमकर थिरके युवा

हंगामे और शोर-शराबे के बीच संगीत का सफर थमा नहीं। बब्बू मान ने अपने सदाबहार गीतों, विशेषकर 'मित्रां दी छतरी' जैसे चार्टबस्टर्स से माहौल को अंत तक बांधे रखा। पुलिस की सख्ती के बाद जब व्यवस्था बहाल हुई, तो युवाओं ने देर रात तक गीतों का लुत्फ उठाया।

सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन

मुख्य आकर्षण से पहले, शाम की शुरुआत हिमाचली लोक कलाकारों के नाम रही। स्थानीय गायकों और नर्तकों ने पारंपरिक धुनों के साथ उत्सव का शानदार आधार तैयार किया था। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप ने पूरे सुजानपुर को पहाड़ी संस्कृति के रंगों से सराबोर कर दिया।

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