विधानसभा में गूंजा स्मार्ट मीटर और प्राइवेट स्कूलों की फीस का मुद्दा, CM सुक्खू और शिक्षा मंत्री ने किए ये बड़े ऐलान

Edited By Vijay, Updated: 27 Mar, 2026 05:23 PM

smart meters and private school fees

प्रदेश में स्मार्ट मीटर के ज्यादा बिल आने से परेशान उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी उपभोक्ता का स्मार्ट मीटर का बिल अधिक आता है, तो उसे तुरंत दुरुस्त किया जाएगा।

शिमला (कुलदीप): प्रदेश में स्मार्ट मीटर के ज्यादा बिल आने से परेशान उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी उपभोक्ता का स्मार्ट मीटर का बिल अधिक आता है, तो उसे तुरंत दुरुस्त किया जाएगा। वहीं, प्रदेश सरकार निजी स्कूलों द्वारा वसूली जाने वाली मनमानी फीस पर लगाम कसने के लिए भी सख्त कदम उठाने जा रही है। सदन में विधायक आशीष बुटेल, राम कुमार और अजय सोलंकी द्वारा पूछे गए संयुक्त प्रश्न का उत्तर देते हुए सीएम सुक्खू ने कहा कि बिल ज्यादा आने की स्थिति में उपभोक्ता संबंधित डिवीजन के अधिशासी अभियंता से सीधे संपर्क कर सकते हैं।

स्मार्ट मीटर लगाना राज्य सरकार की मजबूरी
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि स्मार्ट मीटर लगाना राज्य सरकार की मजबूरी भी है, क्योंकि यह भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय की योजना है। यदि राज्य सरकार ये मीटर नहीं लगाती है, तो केंद्र की तरफ से बिजली क्षेत्र में सुधार के लिए मिलने वाली करोड़ों रुपये की सहायता राशि रोक दी जाएगी।

दिसम्बर तक पूरा होगा काम, खराब मीटर भी है बिल में अंतर की वजह
सीएम ने बताया कि आरडीएसएस योजना के तहत लॉस रिडक्शन (नुक्सान कम करने) और स्मार्ट मीटरिंग का काम चल रहा है। कुछ जगहों पर काम की गति धीमी रही है, इसलिए इसे पूरा करने की समय सीमा दिसंबर तक बढ़ाई जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि मीटर रीडिंग में अंतर आने का एक बड़ा कारण पुराने मीटरों का खराब होना भी है, जिससे नई और पुरानी रीडिंग में फर्क आ रहा है।

निजी स्कूलों की मनमानी फीस पर लगेगी ब्रेक, नियमों में होगा बदलाव: रोहित ठाकुर
दूसरी ओर, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने निजी स्कूलों की मनमानी फीस को लेकर बड़ा बयान दिया है। विधायक राम कुमार के सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत गरीब बच्चों को 25 फीसदी सीटों पर प्रवेश दिलाने और फीस को नियंत्रित करने के लिए नियमों में संशोधन पर विचार कर रही है। उन्होंने बताया कि सरकार इस मामले में उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों के मॉडल का अध्ययन कर रही है, जहां निजी स्कूलों की फीस को नियंत्रित करने के कड़े प्रावधान हैं। हिमाचल में भी लगातार आ रही शिकायतों के बाद सरकार इसी दिशा में आगे बढ़ेगी।

रामशहर कॉलेज का 69 फीसदी काम पूरा, लेकिन छात्रों की कम संख्या चिंताजनक
विधायक हरदीप सिंह बावा द्वारा पूछे गए एक अन्य सवाल के जवाब में शिक्षा मंत्री ने बताया कि रामशहर कॉलेज भवन का 69 फीसदी निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। शेष 31 फीसदी काम के लिए 6.62 करोड़ रुपए की जरूरत है, जिसे सरकार जल्द पूरा करवाने का प्रयास कर रही है। हालांकि, शिक्षा मंत्री ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि करोड़ों की लागत से बन रहे इस कॉलेज में विद्यार्थियों की संख्या 75 से भी कम है।

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