Shimla: अब सोशल मीडिया पर पुलिस वर्दी में रील, वीडियो, फोटो, स्टोरी या पोस्ट नहीं कर पाएंगे अपलोड, एसओपी जारी

Edited By Kuldeep, Updated: 08 Dec, 2025 11:18 PM

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पुलिस वर्दी में सोशल मीडिया के उपयोग के संबंध में हिमाचल पुलिस विभाग ने एक एसओपी जारी की है।

शिमला (ब्यूरो): पुलिस वर्दी में सोशल मीडिया के उपयोग के संबंध में हिमाचल पुलिस विभाग ने एक एस.ओ.पी. जारी की है। इस मानक संचालन प्रक्रिया का उद्देश्य पुलिस वर्दी की गरिमा बनाए रखना, पुलिस विभाग की सार्वजनिक छवि एवं जन विश्वास की रक्षा करना, सोशल मीडिया के दुरुपयोग की रोकथाम करना, संवेदनशील, गोपनीय एवं आधिकारिक सूचनाओं के अनधिकृत प्रसार को रोकना, हिमाचल प्रदेश पुलिस अधिनियम, पुलिस रूल्स, केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियम 1964 तथा अन्य लागू नियमों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करना है। इसके तहत कोई भी पुलिस अधिकारी/कर्मचारी पुलिस वर्दी में मनोरंजन, निजी प्रचार, धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक या व्यक्तिगत प्रकृति की रील, वीडियो, फोटो, स्टोरी या पोस्ट अपलोड नहीं करेगा।

साथ ही निजी सोशल मीडिया खातों पर पुलिसिंग से संबंधित जानकारी, जांच की स्थिति, अपराध से जुड़ी सामग्री आरोपी/पीड़ित की पहचान, ड्यूटी स्थल की वीडियो आदि सांझा नहीं करेगा। किसी भी शासकीय दस्तावेज, आदेश, पत्राचार, वायरलैस संदेश, केस डायरी अथक विभागीय सूचना को अनधिकृत रूप से प्रसारित नहीं करेगा। पुलिसकर्मियों ने अपने निजी सोशल मीडिया अकाऊंट्स के माध्यम से सरकारी नीतियों, पुलिस मुख्यालय के निर्णय, पुलिसिंग या आधिकारिक कार्यों पर टिप्पणी नहीं करेंगे। केवल वही अधिकारी/कर्मचारी विभागीय सोशल मीडिया हैंडल पर कोई भी सामग्री कर सकेंगे, जो सक्षम प्राधिकारी द्वारा लिखित रूप में अधिकृत हों। सभी आधिकारिक पोस्ट केवल प्रैस नोट, जन-जागरूकता अभियानों, कानून व्यवस्था से संबंधित आधिकारिक सूचनाओं तक सीमित होंगी।

दोषी अधिकारी/कर्मचारी के विरुद्ध विभागीय जांच, निलंबन, वेतन वृद्धि रोकना,पदावनति अथवा सेवा से हटाने तक की कार्रवाई की जा सकती है। यदि कृत्य में आपराधिक तत्व पाए जाते हैं तो आपराधिक अभियोजन भी चलाया जाएगा। प्रत्येक जिला पुलिस अधीक्षक, कमाडैंट एवं इकाई प्रमुख यह सुनिश्चित करेगा कि अपने अधीनस्थ कर्मियों को इस एसओपी की विधिवत जानकारी दी जाए। प्रत्येक थाना प्रभारी/इकाई प्रभारी समय-समय पर समीक्षा करेगा और उल्लंघन की रिपोर्ट तुरंत उच्चाधिकारियों को भेजेगा। राज्य स्तर पर पुलिस मुख्यालय द्वारा निगरानी तंत्र विकसित किया जाएगा।

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