Edited By Kuldeep, Updated: 27 Apr, 2026 08:48 PM

हिमाचल प्रदेश में आगामी पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों से पहले राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए चिट्टा व हैरोइन के अवैध कारोबार में संलिप्त लोगों को चुनाव लड़ने से रोकने का रास्ता साफ कर दिया है।
शिमला (भूपिन्द्र): हिमाचल प्रदेश में आगामी पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों से पहले राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए चिट्टा व हैरोइन के अवैध कारोबार में संलिप्त लोगों को चुनाव लड़ने से रोकने का रास्ता साफ कर दिया है। इस संबंध में हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2026 को विधानसभा से पारित कर राज्यपाल की मंजूरी के लिए लोकभवन भेज दिया गया है। सरकार को उम्मीद है कि चुनाव घोषणा से पहले ही इस विधेयक को मंजूरी मिल जाएगी।
विधानसभा से पारित इस संशोधन विधेयक के तहत नशे के मामलों में संलिप्त लोगों पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। यदि किसी निर्वाचित प्रतिनिधि के खिलाफ चिट्टा मामलों में आरोप तय होते हैं, तो उसे प्रधान पद से हटाया जा सकेगा। वहीं ऐसे मामलों में दोषी पाए गए व्यक्ति पंचायत चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। इस फैसले से नशे के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी और पंचायत स्तर पर स्वच्छ एवं पारदर्शी नेतृत्व सुनिश्चित होगा।
इसके अलावा विधेयक में पंचायतों की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कोरम से जुड़े प्रावधानों में भी बदलाव किया गया है। अब ग्राम सभा की बैठक में कोरम पूरा करने के लिए पंचायत के कम से कम 30 सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य होगी। साथ ही कुल मतदाताओं की 10 प्रतिशत उपस्थिति भी आवश्यक मानी जाएगी। परिवार आधारित उपस्थिति को मान्य नहीं किया जाएगा।
जिला परिषद स्तर पर भी कोरम की सीमा को संशोधित करते हुए इसे एक-तिहाई कर दिया गया है, जिससे बैठकों में निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज हो सके। विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि अवैध कब्जाधारक, सहकारी बैंकों के डिफाल्टर और ऑडिट रिकवरी लंबित रखने वाले व्यक्ति भी पंचायत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य होंगे।