Edited By Kuldeep, Updated: 25 Feb, 2026 10:45 PM

प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि वह स्वास्थ्य संस्थानों को हिमकेयर योजना के तहत प्रदान की गईं सेवाओं के बिलों का भुगतान 25 मार्च से पहले जारी करे।
शिमला (मनोहर): प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि वह स्वास्थ्य संस्थानों को हिमकेयर योजना के तहत प्रदान की गईं सेवाओं के बिलों का भुगतान 25 मार्च से पहले जारी करे। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ ने याचिकाकर्त्ता अस्पताल मैसर्ज मातृ मैडिसिटी एंड ऑर्थो केयर हॉस्पिटल ऊना और मैसर्ज डा. नीना पाहवा प्रसूति गृह बिर्ट जिला कांगड़ा द्वारा दायर याचिकाओं की प्रारंभिक सुनवाई के पश्चात ये आदेश जारी किए। प्रार्थियों का कहना है कि उनके बिल स्वीकृति के बावजूद जारी नहीं किए जा रहे हैं, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। कोर्ट ने राज्य सरकार के स्वास्थ्य सचिव को नोटिस जारी कर 3 सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया है। प्रार्थियों का कहना है कि उनके बिल हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य बीमा योजना सोसायटी की वैबसाइट पर भी प्रदर्शित हैं।
इसके बावजूद प्रतिवादी राज्य सरकार याचिकाकर्त्ताओं के विधिवत स्वीकृत बिलों/दावों का भुगतान जारी करने में विफल रही है। उनका कहना है कि विधिवत स्वीकृत बिलों/दावों का भुगतान जारी न होने से उन्हें वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। याचिकाकर्त्ताओं के प्रतिवादियों के अंतर्गत सूचीबद्ध स्वास्थ्य सेवा प्रदाता होने के कारण हिमकेयर लाभार्थियों को नकद रहित उपचार प्रदान करने के लिए उनके बिल/दावे विधिवत स्वीकृत होने के बावजूद प्रतिवादियों द्वारा याचिकाकर्त्ताओं को भुगतान जारी न करने की कार्रवाई उचित नहीं ठहराई जा सकती।
प्रार्थियों का कहना है कि 29.12.2018 की नोटिफिकेशन के जरिए प्रदेश सरकार ने भी मुख्यमंत्री हिमाचल हैल्थ केयर स्कीम (हिमकेयर) के तहत कैशलैस ट्रीटमैंट कवरेज देना शुरू किया था। हिमकेयर स्कीम के तहत पैनल में शामिल अस्पतालों में हर परिवार को हर साल 5 लाख रुपए तक का कैशलैस ट्रीटमैंट कवरेज दिया जा रहा है। प्रार्थियों के अनुसार पैनल में शामिल हैल्थ केयर प्रोवाइडर्स होने के नाते वे कानूनी तौर पर हिमकेयर स्कीम के तहत लाभार्थियों को कैशलैस ट्रीटमैंट देने के लिए मजबूर हैं। स्कीम की गाइडलाइंस के मुताबिक उन्होंने अपने बिल भुगतान के लिए जमा किए हैं और सभी बिल/क्लेम अप्रूव हो गए हैं। इसके बावजूद राज्य सरकार उनके सही तरीके से अप्रूव बिल/क्लेम की पेमैंट जारी करने में असफल रही है।