Shimla: स्नातक कक्षाओं में शुरू होगा क्षमता संवर्धन पाठ्यक्रम

Edited By Kuldeep, Updated: 04 Apr, 2025 08:24 PM

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हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) लागू करने की कवायद के बीच एनईपी ऑर्डीनैंस का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है।

शिमला (अभिषेक): हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) लागू करने की कवायद के बीच एनईपी ऑर्डीनैंस का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। ड्राफ्ट को फाइनल करने के लिए विश्वविद्यालय में एनईपी व परीक्षा ऑर्डीनैंस की कमेटी की बैठक मेें एनईपी के प्रारूप को लेकर विस्तृत चर्चा की गई और इस दौरान एनईपी ऑर्डीनैंस का ड्राफ्ट तैयार किया गया। अब इस ड्राफ्ट को उच्च अधिकारियों को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद शेष औपचारिकताओं को पूरा कर इसे लागू किया जाएगा।

एनईपी व परीक्षा ऑर्डीनैंस की कमेटी की बैठक विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो. श्याम लाल कौशल की अध्यक्षता में हुई। प्रो. कौशल एनईपी ऑर्डीनैंस व परीक्षा सब-कमेटी के समन्वयक का कार्यभार भी देख रहे हैं। फाइनल किए गए एनईपी ऑर्डीनैंस के ड्राफ्ट के तहत विद्यार्थियों को स्नातक स्तर पर क्षमता संवर्धन पाठ्यक्रम कोर्सिज शुरू होंगे। अगले शैक्षणिक सत्र 2025-26 से स्नातक स्तर पर एनईपी लागू होना तय है, ऐसे में विद्यार्थियों को स्नातक स्तर पर कोर कोर्सिज के अलावा अब क्षमता संवर्धन पाठ्यक्रम भी पढ़ाया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई पूरी होने के बाद रोजगार प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त अवसर मिल सकें।

इसके अलावा मल्टीपल एंट्री व एग्जिट प्रणाली लागू होगी। इस प्रणाली के अंतर्गत प्रथम वर्ष की पढ़ाई पूरी करने के बाद विद्यार्थी यदि सिस्टम से बाहर आना चाहे तो 40 क्रैडिट्स प्राप्त करने व 4 क्रैडिट्स के साथ वोकेशनल कोर्स पूरा करने पर यूजी सर्टीफिकेट दिया जाएगा। 2 वर्ष की पढ़ाई पूरी होने के बाद यूजी डिप्लोमा मिलेगा। इसके लिए 80 क्रैडिट्स लेेने के अलावा द्वितीय वर्ष में 4 क्रैडिट्स के साथ वोकेशनल कोर्स पूरा करने पर यूजी डिप्लोमा मिलेगा। 3 वर्ष का कोर्स 120 क्रैडिट्स के साथ पूरा करने के बाद स्नातक की डिग्री मिलेगी, जबकि 4 वर्ष की पढ़ाई करने पर यूजी डिग्री (ऑनर्स) दी जाएगी, जिसके लिए 160 क्रैडिट्स अनिवार्य होंगे।

शोध/ऑनर्स के साथ 4 वर्ष में डिग्री प्राप्त करने के न्यूनतम 160 क्रैडिट निर्धारित किए गए हैं। विश्वविद्यालय सहित कॉलेजों में करिकुलम एंड क्रैडिट फ्रेमवर्क के अंतर्गत मल्टीपल एंट्री एंड एग्जिट, फ्लैक्सिबल डिग्री ऑप्शन्स को लागू किया जाएगा। मल्टीपल एंट्री व मल्टीपल एग्जिट प्रणाली के अंतर्गत डिग्री कोर्स में रि-एंटर का प्रारूप भी जारी कर दिया गया है। इसके तहत विद्यार्थियों को यूजी सर्टीफिकेट से एग्जिट करने के बाद डिग्री कोर्स में 3 वर्ष के भीतर रि-एंटर करना होगा और डिग्री प्रोग्राम अधिकतम 7 वर्ष में पूरा करना अनिवार्य होगा।

अंक विभाजन, पास प्रतिशतता, अंक तालिका के प्रारूप को भी किया गया तय
एनईपी के तहत स्नातक स्तर पर सैमेस्टर पैटर्न लागू करने का भी निर्णय लिया गया है। इसको देखते हुए बैठक में पाठ्यक्रम के अनुसार परीक्षा प्रणाली, अंक विभाजन, उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन, पास प्रतिशतता, अंक तालिका के प्रारूप को भी तय किया गया। बैठक में स्नातक कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए हर विषय में बिना प्रैक्टीकल परीक्षाओं में 70 अंक की थ्योरी और 30 अंकों की इंटरनल असैस्ममैंट, प्रैक्टीकल परीक्षाओं में 50 अंक की थ्योरी परीक्षा, 20 अंक प्रैक्टीकल के और 30 अंक इंटरनल असैस्मैंट में से दिए जाने पर सहमति बन गई है। हर विद्यार्थी को अगले सैमेस्टर में जाने के लिए ओवरऑल न्यूनतम अंक की शर्त और हर परीक्षा में न्यूनतम अंक भी तय किए हैं।

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