Edited By Kuldeep, Updated: 06 Jan, 2026 04:50 PM

बहुचर्चित फर्जी डिग्री केस में भगौड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किए जाने के बाद आरोपियों को स्वदेश लाने की कवायद भी तेज होगी। ईडी की जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपी अशोनी कंवर और मनदीप राणा (मां-बेटे) ऑस्ट्रेलिया में रह रहे हैं।
शिमला (ब्यूरो): बहुचर्चित फर्जी डिग्री केस में भगौड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किए जाने के बाद आरोपियों को स्वदेश लाने की कवायद भी तेज होगी। ईडी की जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपी अशोनी कंवर और मनदीप राणा (मां-बेटे) ऑस्ट्रेलिया में रह रहे हैं। जांच के तहत भगौड़ा आर्थिक अपराधी घोषित होने का दर्जा यह साबित करता है कि दोनों आरोपी जानबूझकर कानून से बच रहे हैं। इससे अब विदेशी अदालत में पूरी मजबूती पक्ष रखा जा सकेगा। साथ ही आरोपियों पर आर्थिक और कानूनी दबाव बढ़ेगा तथा उनकी अंतर्राष्ट्रीय गतिविधियां सीमित हो जाएंगी। ईडी की जांच में पता चला कि आरोपी राज कुमार राणा ने अपनी पत्नी अशोनी कंवर और पुत्र मनदीप राणा सहित अन्य सह-आरोपियों की मदद से एजैंटों व छात्रों से पैसे लेकर फर्जी डिग्रियां बेचीं। ये फर्जी डिग्रियां मानव भारती विश्वविद्यालय सोलन के नाम पर बेची गईं।
फर्जी डिग्रियों की बिक्री से प्राप्त अपराध की धनराशि 387 करोड़ रुपए आंकी गई है। इस अवैध गतिविधि से प्राप्त धन का उपयोग आरोपितों ने विभिन्न राज्यों में अपने नाम और अन्य संबंधित संस्थाओं के नाम पर विभिन्न चल और अचल संपत्तियां खरीदने के लिए किया। ईडी ने इस मामले में अब तक लगभग 200 करोड़ रुपए की संपत्तियां जब्त की हैं। ईडी इस मामले में धर्मपुर पुलिस स्टेशन जिला सोलन में आईपीसी 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज 3 एफआईआर के आधार पर जांच कर रही है। जांच के दौरान सामने आया कि अशोनी कंवर और मंदीप राणा एफआईआर दर्ज होने के बाद देश छोड़कर भाग गए थे और वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया में रह रहे हैं।
दोनों व्यक्तियों को जांच में शामिल होने के लिए तलब किया गया था, लेकिन वे कभी भी जांच में शामिल नहीं हुए। इस मामले में एजैंटों की संपत्तियां भी ईडी के निशाने पर हैं। मुख्य आरोपियों के साथ ही कुछ एजैंटों की संपत्तियां पहले ही अटैच की जा चुकी हैं। मामला कई राज्यों तक फैला होने के चलते जांच एजैंसी हर पहलू को गंभीरता से खंगाल रही है। ऐसे में आने वाले समय में कुछ नए खुलासे भी हो सकते हैं।
17 से अधिक राज्यों में बेचीं डिग्रियां
सूत्रों के अनुसार आरोपियों ने देश के करीब 17 से अधिक राज्यों में फर्जी डिग्रियां बेचीं। इसके साथ ही विदेशों में भी डिग्रियां बेचने के तथ्य सामने आए हैं। एक-एक डिग्री की एवज में लाखों रुपए लिए गए। इसके लिए एजैंटों का सहारा लिया गया है। हजारों डिग्रियां बेच कर 387 करोड़ रुपए अर्जित किए गए। ऐसे में आरोपियों को भारत लाकर कानून के कटघरे में खड़ा करने के लिए एजैंसियां हरसंभव प्रयास कर रही हैं।