बिलासपुर में फैल रहा स्क्रब टाइफस बुखार, 193 मामले दर्ज, विभाग ने छेड़ा जागरूकता अभियान

Edited By Ekta, Updated: 08 Sep, 2019 12:44 PM

scrub typhus fever spreading in bilaspur

डेंगू की तरह इन दिनों बिलासपुर में स्क्रब टाइफस बुखार तेजी से फैल रहा है। कीट-पिस्सू के काटने से पनपने वाले इस बुखार के मरीजों का पिछले कुछ दिनों से लगातार इजाफा हो रहा है। शहरी क्षेत्र की अपेक्षा ग्रामीण इलाकों में स्क्रब टाइफस के मामले अधिक सामने...

बिलासपुर (प्रकाश): डेंगू की तरह इन दिनों बिलासपुर में स्क्रब टाइफस बुखार तेजी से फैल रहा है। कीट-पिस्सू के काटने से पनपने वाले इस बुखार के मरीजों का पिछले कुछ दिनों से लगातार इजाफा हो रहा है। शहरी क्षेत्र की अपेक्षा ग्रामीण इलाकों में स्क्रब टाइफस के मामले अधिक सामने आ रहे हैं। क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर में रोजाना 20 से 30 लोगों के स्क्रब टाइफस के टैस्ट किए जा रहे हैं। जिनमें से औसतन करीब 8 लोगों में स्क्रब टाइफस के लक्षण पॉजीटिव पाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग बिलासपुर से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार सितम्बर माह में अभी तक 28 लोगों में स्क्रब टाइफस के लक्षण पाए गए हैं। वहीं इस सीजन में जिलाभर से स्क्रब टाइफस के कुल 193 मामले दर्ज किए जा चुके हैं।  

इस बीमारी से सबसे अधिक मारकंड ब्लॉक सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र रहा है। वहीं स्क्रब टाइफस ने हर आयु के लोगों को अपनी चपेट में ले रखा है जिसमें 5 वर्ष के नौनिहाल सहित 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला शामिल है। वहीं जिला स्वास्थ्य अधिकारी परविंद्र शर्मा ने बताया कि स्क्रब टाइफस से पीड़ित लोगों को विशेष रूप से मॉनीटर किया जा रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि घरों के आसपास झाडिय़ां और घास न उगने दें। जिला के सभी सामुदायिक व प्राथमिक केंद्रों के अधिकारी व कर्मचारियों को स्क्रब टाइफस के प्रति लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं।

स्क्रब टाइफस के लक्षण

संक्रमित होने के 5 से लेकर 12 दिनों तक के भीतर रोग के लक्षण सामने आने लगते हैं। शुरूआत में सिर दर्द, भूख न लगना व तबीयत का भारीपन अनुभव होने के बाद अचानक सर्दी लगकर तेज बुखार चढ़ता है और बहुत ज्यादा कमजोरी हो जाती है। इस रोग से आने वाला बुखार 7 से लेकर 12 दिन तक रहता है। बुखार के चौथे से लेकर छठे दिन तक के भीतर शरीर पर दाने निकल आते हैं। यह रोग कम उम्र के लोगों के लिए खतरनाक नहीं होता है परंतु 40 वर्ष से ऊपर की आयु के पचास प्रतिशत रोगी और 60 वर्ष से ऊपर के मरीजों के लिए यह प्राणघातक हो सकता है।

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