RSS के स्वयंसेवकाें ने फिर पेश की मानवता की मिसाल, कोविड संभावित मृतक का करवाया अंतिम संस्कार

Edited By Vijay, Updated: 15 May, 2021 03:47 PM

rss volunteers once again set the example of humanity

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता एक बार फिर मानवता के लिए मिसाल बने हैं। प्रदेश की राजधानी शिमला के न्यू शिमला क्षेत्र से सटे रझयाणा में बीते वीरवार कोविड की संभावना के बीच वीरेंद्र सूद का निधन हो गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार 75 वर्षीय स्व....

शिमला (ब्यूराे): राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता एक बार फिर मानवता के लिए मिसाल बने हैं। प्रदेश की राजधानी शिमला के न्यू शिमला क्षेत्र से सटे रझयाणा में बीते वीरवार कोविड की संभावना के बीच वीरेंद्र सूद का निधन हो गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार 75 वर्षीय स्व. वीरेंद्र सूद लोक निर्माण विभाग से बतौर अधिशासी अभियंता सेवानिवृत्त हुए थे। बीते कुछ दिनों से वे अस्वस्थ चल रहे थे और बुखार की भी शिकायत थी। हृदय रोगी होने के चलते उन्हें हार्ट में स्टंट पड़े थे और वे डायबटिक भी थे। कई बीमारियों की चपेट में होने के बावजूद वे भारी-भरकम शरीर के मालिक थे।

बीते वीरवार की सुबह तड़के उनकी तबीयत काफी खराब हो गई। इसे देखते हुए परिवार ने 108 एम्बुलैंस को काॅल कर उन्हें अस्पताल ले जाने का फैसला लिया लेकिन इससे पहले कि उन्हें एम्बुलैंस से अस्पताल पहुंचाया जाता सुबह 7.30 बजे उनका देहांत हो गया। स्वयंसेवकों द्वारा डीडीयू अस्पताल से संपर्क कर मौके पर डॉक्टर भेजकर उनकी जांच करने का आग्रह किया गया, ऐसे में अस्पताल प्रशासन द्वारा मौके पर डॉ. हिमानी को भेजा गया और उनकी मौत की पुष्टि कर दी गई लेकिन इस दौरान स्व. वीरेंद्र सूद की कोविड जांच नहीं हो सकी, जिसका मुख्य कारण घटना स्थल पर पहुंचे चिकित्सक के पास कोविड-19 रैपिड टैस्ट किट न होना तथा अस्पताल द्वारा मृतक का अस्पताल में ही आईसीआरटी टैस्ट होने का हवाला दिया गया, जिसकी रिपोर्ट आने में दो से तीन दिन लगने के बारे में जानकारी दी गई, साथ ही अस्पताल में टैस्ट न करवा पाने की स्थिति में शव का दाह संस्कार करने के लिए कोविड नियमों के पालन का भी हवाला दे डाला।

दूसरी ओर अंतिम संस्कार के लिए स्व. विरेंद्र सूद के बडे़ बेटे विवेक करोल जो चंड़ीगढ़ में रियल इस्टेट का काम करते हैं, उनको कोविड पास आदि की औपचारिकताओं के कारण शिमला पहुंचने में लगातार देरी हो रही थी। कोरोना संभावित होने के चलते शव को अधिक समय तक घर पर रखना परिवार के लिए चिंताजनक था। परिवार पर शव काे जल्द से जल्द अंतिम संस्कार करने का दवाब था लेकिन पीपीई किट कहां से मिलेगी? और किस वाहन से शव को श्मशानघाट ले जाया जा सकेगा? और श्मशानघाट में उन्हें अंतिम संस्कार करने की इजाजत मिलेगी या नहीं? ऐसे कई यक्ष प्रश्न थे जिसके कारण परिवार की चिंता बढ़ी हुई थी।

जब पड़ोस के कई लोग और रिश्तेदार उनके घर पर भी जाने से कतरा रहे थे ताे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता कुलदीप कुमार, जगत सहित विजय शर्मा व उनकी धर्मपत्नी नीलम शर्मा जो पेशे से नर्स हैं परिवार की मदद के लिए आगे आए। शिमला विभाग के संघचालक अजय कुमार के सहयोग से सरस्वती विद्या मंदिर विकासनगर से 3 पीपीई किट्स सहित कुल 6 पीपीई किट्स का प्रबंध किया गया। स्वयंसेवकों ने ऐसे में परिवार में मौजूद बच्चों और अन्य बुजुर्गों को सुरक्षित रखते हुए कार्य को अंजाम दिया गया, साथ ही कोविड मृतकों के लिए निर्धारित कनलोग स्थित रोटरी क्लब श्मशानघाट में शव को लेकर पहुंचे और वहां मृतक के बड़े बेटे विवेक करोल की मौजूदगी में हिन्दू रीति से अंतिम संस्कार किया गया।

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