मनाली के 9 गांवों में 42 दिन के लिए लगी पाबंदियां... न बजेगा फोन, न चलेगा टीवी, जान लें कड़े नियम

Edited By Jyoti M, Updated: 15 Jan, 2026 01:56 PM

restrictions have been imposed in 9 villages of manali for 42 days

मनाली के घाटी में एक ऐसी 'डिजिटल फास्टिंग' शुरू हुई है, जिसका कारण कोई तकनीकी लत छुड़ाना नहीं, बल्कि सदियों पुरानी धार्मिक अटूट आस्था है। जहाँ पूरी दुनिया 5G और शोर-शराबे की रफ़्तार से दौड़ रही है, वहीं हिमाचल प्रदेश के मनाली की ऊझी घाटी ने खुद को पूरी...

हिमाचल डेस्क। मनाली के घाटी में एक ऐसी 'डिजिटल फास्टिंग' शुरू हुई है, जिसका कारण कोई तकनीकी लत छुड़ाना नहीं, बल्कि सदियों पुरानी धार्मिक अटूट आस्था है। जहाँ पूरी दुनिया 5G और शोर-शराबे की रफ़्तार से दौड़ रही है, वहीं हिमाचल प्रदेश के मनाली की ऊझी घाटी ने खुद को पूरी तरह 'साइलेंट मोड' पर डाल लिया है।

यहाँ के नौ गाँवों में एक अनोखी परंपरा के तहत अगले डेढ़ महीने तक सन्नाटा पसरा रहेगा। मान्यता है कि मकर संक्रांति के बाद यहाँ के स्थानीय देवता—गौतम ऋषि, ब्यास ऋषि और नाग देवता—गहन साधना (तपस्या) में चले जाते हैं। अपने आराध्य की शांति में कोई खलल न पड़े, इसलिए ग्रामीणों ने स्वेच्छा से आधुनिक सुख-सुविधाओं का त्याग कर दिया है।

सन्नाटे का पहरा: क्या-क्या रहेगा बंद?

इन गाँवों में रहने वाले लोग और यहाँ आने वाले पर्यटक, दोनों को ही कड़े नियमों का पालन करना होगा:

इलेक्ट्रॉनिक ब्रेक: अगले 42 दिनों तक टीवी पूरी तरह बंद रहेंगे और मोबाइल फोन को साइलेंट मोड पर रखना अनिवार्य होगा।

श्रम पर विराम: खेती-बाड़ी और बागवानी से जुड़े तमाम शोर करने वाले कामों को रोक दिया गया है।

गूँज पर पाबंदी: मंदिरों में न घंटियाँ बजेंगी और न ही कोई ऊंची आवाज में बात कर सकेगा। यहाँ तक कि मंदिरों के कपाट भी बंद कर दिए गए हैं।

परंपरा की कमान युवाओं के हाथ

हैरानी की बात यह है कि जहाँ आज की युवा पीढ़ी बिना इंटरनेट के एक पल नहीं रह सकती, वहीं इन गाँवों (जैसे गौशाल, सोलंग, पलचान और कोठी) के युवा बड़े उत्साह से इस प्राचीन रिवाज को निभा रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह परंपरा किसी दबाव में नहीं बल्कि श्रद्धा के कारण जीवित है।

सिमसा और लाहौल में भी 'देव-आदेश' का असर

मनाली के पास सिमसा में स्थित कार्तिक स्वामी मंदिर के कपाट भी बंद कर दिए गए हैं। कन्याल और छियाल जैसे इलाकों में 'फागली उत्सव' तक किसी भी तरह के शोर की मनाही है।

दूसरी ओर, अटल टनल पार करते ही लाहौल घाटी के सिस्सू गाँव में भी 'हालडा उत्सव' की वजह से बाहरी लोगों और पर्यटकों के प्रवेश पर 28 फरवरी तक रोक लगा दी गई है। देव-नियमों के अनुसार, उत्सव के दौरान गाँव की पवित्रता बनाए रखने के लिए बाहरी दखल को पूरी तरह वर्जित रखा गया है।

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