Kangra: नए साधन जुटाने तथा खर्चों में बचत का बजट में प्रावधान नहीं : शांता

Edited By Kuldeep, Updated: 23 Mar, 2026 04:37 PM

palampur budget provisions

पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री शांता कुमार ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के इतिहास में इस साल की तरह कभी किसी सरकार ने बजट पेश नहीं किया।

पालमपुर (भृगु): पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री शांता कुमार ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के इतिहास में इस साल की तरह कभी किसी सरकार ने बजट पेश नहीं किया। बजट में नए विकास करने के लिए नए साधन जुटाए जाते हैं और सरकारी खर्चों में बचत करके भी पैसा जुटाया जा सकता है। इस प्रकार की कोई सार्थक कोशिश इस बजट में नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में पनबिजली की बहुत-सी योजनाएं चल रही हैं। इस प्रकार की और भी बहुत सी योजनाएं शुरू की जा सकती हैं। मैंने अपने समय में पनबिजली योजनाओं में जो राॅयल्टी का सिद्धान्त मनवाया था, उससे सरकार को करोड़ों रुपए की आय हो रही है। उस समय राॅयल्टी 12 प्रतिशत तय हुई थी।

आज उस समय के मुकाबले बिजली की कीमत कई गुना बढ़ चुकी है परन्तु रॉयल्टी 12 प्रतिशत पर ही टिकी हुई है। हिमाचल सरकार को इस विषय पर गंभीर संघर्ष करना चाहिए। यदि बिजली की कीमत उस समय के मुकाबले कई गुना बढ़ चुकी है तो उस बिजली को बनाने वाले पानी की रॉयल्टी भी बढ़‌नी चाहिए। 12 प्रतिशत के मुकाबले कम से कम यह राॅयल्टी 30 प्रतिशत होनी चाहिए। इस विषय पर पूरे हिमाचल को एक बड़ा संघर्ष करना चाहिए।

शानन परियोजना के लिए संघर्ष करे सरकार
शांता कुमार ने कहा कि लोकसभा द्वारा पुनर्गठन कानून के अनुसार जोगिंद्रनगर शानन परियोजना हिमाचल प्रदेश को मिलनी चाहिए। उस कानून में यह लिखा था कि इस पुनर्गठन के बाद सांझे पंजाब की जो सम्पत्ति जिस नए प्रदेश में होगी, उस पर उसी प्रदेश की मिलकीयत होगी। इस कानून के अनुसार आज से कई वर्ष पहले 1966 में शानन परियोजना हिमाचल को मिलनी चाहिए थी। इस पर भी हिमाचल प्रदेश भारत सरकार से प्राप्त करने के लिए संघर्ष करे।

मुख्यमंत्री के काफिले में चलती हैं अधिक गाड़ियां
उन्होंने कहा कि सरकारी खर्चों में कमी करने का और भी प्रयत्न करना चाहिए। आज भी मुख्यमंत्री की गाड़ी के साथ बहुत सी गाड़ियां चलती हैं। मेरे समय में केवल 2 गाड़ियां चलती थीं। इसी प्रकार बहुत से अन्य खर्चों में भी बचत की जा सकती है। सरकार एक योग्य लोगों की कमेटी बनाए जो इस प्रकार के सभी खर्चों में बचत की योजना बनाए। इस प्रकार की योजनाओं से छोटा-सा हिमाचल आत्म निर्भर होकर विकास के रास्ते में बढ़ सकता है।

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