Edited By Vijay, Updated: 15 Mar, 2026 06:29 PM

देश सेवा से बढ़कर दुनिया में कोई दौलत नहीं है। हिमाचल प्रदेश के एक होनहार युवा ओम गौतम ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। बिलासपुर जिले के बरठीं गांव से संबंध रखने वाले ओम गौतम का चयन भारतीय सेना में लैफ्टिनैंट के प्रतिष्ठित पद पर हुआ है।
शिमला (संतोष): देश सेवा से बढ़कर दुनिया में कोई दौलत नहीं है। हिमाचल प्रदेश के एक होनहार युवा ओम गौतम ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। बिलासपुर जिले के बरठीं गांव से संबंध रखने वाले ओम गौतम का चयन भारतीय सेना में लैफ्टिनैंट के प्रतिष्ठित पद पर हुआ है। अपनी इस उपलब्धि के लिए उन्होंने एक मल्टी नैशनल कंपनी के लाखों रुपए के आकर्षक वेतन पैकेज को भी ठुकरा दिया। ओम की इस सफलता से न केवल उनके परिवार में, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश में खुशी और गर्व की लहर दौड़ गई है।
फ्रांस की कंपनी का ऑफर ठुकराया
भारतीय सेना में चयन से पहले एक इंजीनियर के रूप में ओम गौतम का भविष्य कॉर्पोरेट जगत में भी बेहद उज्ज्वल था। उनका चयन फ्रांस की जानी-मानी मल्टी नैशनल कंपनी में एक शानदार पैकेज पर हुआ था। आज के दौर में जहां युवा लाखों के पैकेज के पीछे भागते हैं, वहीं ओम ने ऐशो-आराम की जिंदगी और लाखों के वेतन को छोड़कर देश की रक्षा और भारतीय सेना की वर्दी को प्राथमिकता दी। उन्होंने सेना के कठिन चयन मार्ग को चुना और उसमें शानदार सफलता भी हासिल की।
एनआईटी हमीरपुर से हासिल की बीटैक की डिग्री
ओम गौतम की शैक्षणिक यात्रा शुरू से ही असाधारण रही है। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा राजधानी शिमला के प्रतिष्ठित डीएवी लक्कड़ बाजार से पूरी की, जहां उन्होंने 12वीं की बोर्ड परीक्षा में 93 प्रतिशत के शानदार अंक हासिल किए थे। इसके बाद, उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान एनआईटी हमीरपुर से बीटैक की डिग्री हासिल की।
सुशिक्षित परिवार से मिला मार्गदर्शन
ओम की इस शानदार सफलता के पीछे उनके सुशिक्षित परिवार और माता-पिता के निरंतर मार्गदर्शन का बड़ा हाथ है। उनके पिता केशव गौतम वर्तमान में शिक्षा विभाग में उपनिदेशक के पद पर सेवाएं दे रहे हैं, जबकि माता रेखा गौतम राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में वरिष्ठ डाटाबेस विश्लेषक के पद पर तैनात हैं। ओम की एक छोटी बहन भी है, जो वर्तमान में डीएवी लक्कड़ बाजार में 11वीं कक्षा की छात्रा है।
युवाओं के लिए बने प्रेरणास्त्रोत
ओम गौतम की यह सफलता उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन और अटूट संकल्प का परिणाम है। एक सफल इंजीनियर होने के बावजूद सुविधाओं को छोड़कर भारतीय सेना में जाने का उनका यह साहसिक निर्णय, हिमाचल और देश के उन हजारों युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है, जो मातृभूमि के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा रखते हैं।
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