'चनौर कांड' से जागा शिक्षा विभाग: हिमाचल के अब हर स्कूल में लगेंगे CCTV कैमरे, चप्पे-चप्पे पर होगी नजर

Edited By Jyoti M, Updated: 25 Feb, 2026 02:50 PM

now every school in himachal will have cctv cameras

हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था में अब एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। बच्चों की सुरक्षा और स्कूल की संपत्ति की रक्षा को लेकर शिक्षा विभाग ने एक सख्त और आधुनिक रुख अपनाया है। प्रदेश के उन सभी शिक्षण संस्थानों में अब सीसीटीवी (CCTV)...

शिमला/कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था में अब एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। बच्चों की सुरक्षा और स्कूल की संपत्ति की रक्षा को लेकर शिक्षा विभाग ने एक सख्त और आधुनिक रुख अपनाया है। प्रदेश के उन सभी शिक्षण संस्थानों में अब सीसीटीवी (CCTV) कैमरों का जाल बिछाया जाएगा, जो अब तक निगरानी से दूर थे।

हाल ही में कांगड़ा के चनौर स्कूल में हुई एक दर्दनाक घटना ने विभाग को अपनी सुरक्षा नीतियों पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। इस कदम के जरिए सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि स्कूल परिसर के भीतर किसी भी बाहरी या संदिग्ध व्यक्ति की गतिविधि छिपी न रहे।

सुरक्षा का नया घेरा: कहाँ और क्यों लगेंगे कैमरे?

शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी किए गए ताज़ा दिशानिर्देशों के अनुसार, कैमरों की स्थापना केवल औपचारिकता नहीं होगी। इसके लिए रणनीतिक स्थानों का चयन किया गया है।

स्कूल के मुख्य गेट के साथ-साथ उन सभी रास्तों पर नजर रखी जाएगी जहाँ से अनाधिकृत प्रवेश की गुंजाइश है। चूंकि कई स्कूलों में चौकीदारों के पद खाली हैं, इसलिए कंप्यूटर लैब और अन्य कीमती तकनीकी सामान की सुरक्षा अब कैमरों के जिम्मे होगी। किसी भी अनहोनी या अप्रिय घटना की स्थिति में, फुटेज के माध्यम से दोषियों तक पहुँचना और सबूत जुटाना आसान होगा।

फंडिंग और कार्यान्वयन

शिक्षा निदेशक आशीष कोहली ने इस संबंध में सभी जिला उप-निदेशकों और स्कूल प्रमुखों को स्पष्ट निर्देश भेजे हैं। दिलचस्प बात यह है कि इन कैमरों को लगवाने के लिए स्कूलों को अलग से बजट का इंतजार नहीं करना होगा। स्कूल प्रबंधन को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे संस्थान के पास उपलब्ध 'संचित स्कूल निधि' (Accumulated Fund) का उपयोग कर जल्द से जल्द इस सुरक्षा कवच को तैयार करें।

क्यों पड़ी इसकी जरूरत? (फ्लैशबैक)

इस बड़े फैसले की जड़ में देहरा उपमंडल के चनौर स्थित प्राथमिक पाठशाला की वह खौफनाक वारदात है, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। वहां एक मिड-डे मील वर्कर की कैंपस के भीतर ही बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने स्कूल परिसरों की भेद्यता (vulnerability) को उजागर कर दिया, जिसके बाद प्रशासन ने 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाते हुए तकनीक का सहारा लेने का निर्णय लिया।
 

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