Edited By Jyoti M, Updated: 20 Feb, 2026 10:58 AM

हिमाचल प्रदेश की बदलती सामाजिक परिस्थितियों और घरेलू हिंसा के बढ़ते ग्राफ को देखते हुए सरकार अब कुछ अलग करने जा रही है। प्रदेश में अब शहनाई बजने से पहले युवक-युवतियों को 'शादी की ट्रेनिंग' दी जाएगी।
हिमाचल डेस्क। हिमाचल प्रदेश की बदलती सामाजिक परिस्थितियों और घरेलू हिंसा के बढ़ते ग्राफ को देखते हुए सरकार अब कुछ अलग करने जा रही है। प्रदेश में अब शहनाई बजने से पहले युवक-युवतियों को 'शादी की ट्रेनिंग' दी जाएगी। देवभूमि में बिखरते परिवारों को बचाने के लिए 'तेरे मेरे सपने' नाम से एक अनूठी पहल शुरू की जा रही है, जिसके तहत प्रदेश के हर जिले में प्री-मैरिटल कम्युनिकेशन सेंटर (विवाह पूर्व संवाद केंद्र) स्थापित किए जाएंगे।
क्यों पड़ी इस पहल की जरूरत?
हिमाचल में घरेलू कलह के मामले चिंताजनक रूप से बढ़ रहे हैं। उदाहरण के तौर पर कांगड़ा जिले को देखें तो पिछले साल की तुलना में घरेलू हिंसा की घटनाओं में 10% का उछाल आया है।
मौजूदा स्थिति: वर्ष 2025-26 के नवंबर माह तक ही 546 मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जबकि पिछले पूरे सत्र (2024-25) में यह संख्या 798 थी। विभाग ने अब तक 275 जोड़ों के बीच समझौता कराया है, जबकि 139 केस अभी भी अदालती कार्यवाही के अधीन हैं।
हिंसा की जड़ में नशा और उम्मीदों का बोझ
महिला एवं बाल विकास विभाग के विश्लेषण के अनुसार, घरों में होने वाले झगड़ों के पीछे दो मुख्य विलेन हैं: नशा और बढ़ती अपेक्षाएं। कांगड़ा के देहरा ब्लॉक में सर्वाधिक और नगरोटा सूरियां में सबसे कम मामले देखे गए हैं। बैजनाथ, धर्मशाला, नूरपुर और परागपुर जैसे क्षेत्रों में भी स्थिति गंभीर है। विशेषज्ञों का मानना है कि शादी के बाद एक-दूसरे से बहुत अधिक उम्मीदें रखना और नशे की लत, हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ रही है।
कैसे काम करेंगे ये 'काउंसलिंग सेंटर'?
राष्ट्रीय महिला आयोग के निर्देशों के बाद प्रदेश के मुख्य सचिव ने सभी जिला उपायुक्तों को इन केंद्रों को जल्द शुरू करने का आदेश दिया है। जहां पर आपसी संवाद कैसे बेहतर करें, जिम्मेदारियों का बंटवारा और विपरीत परिस्थितियों में तालमेल बिठाने के व्यावहारिक तरीको को सिखाया जाएगा। महिला एवं बाल विकास विभाग को इन केंद्रों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कांगड़ा में इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है।
पंकज ललित, निदेशक, महिला एवं बाल विकास विभाग का कहना है कि "राष्ट्रीय महिला आयोग और मुख्य सचिव के बीच हुई चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया है। इन केंद्रों के जरिए हम युवाओं को वैवाहिक जीवन की चुनौतियों के प्रति जागरूक करेंगे ताकि वे एक मजबूत नींव के साथ नई जिंदगी शुरू कर सकें।"
एक नई शुरुआत की ओर
हिमाचल सरकार की यह पहल न केवल हिंसा रोकने का एक जरिया है, बल्कि यह बदलते समाज में टूटते रिश्तों को जोड़ने की एक मनोवैज्ञानिक कोशिश भी है। अगर शादी से पहले ही कड़वाहट की वजहों को समझ लिया जाए, तो भविष्य के कई विवादों को टाला जा सकता है।