Mandi: प्रिंसीपल पद पर पदोन्नत शिक्षकों को मिले नियुक्ति

Edited By Kuldeep, Updated: 27 Oct, 2025 10:45 PM

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हिमाचल प्रदेश के सरकारी महाविद्यालयों में प्रिंसीपल के पुनर्नियोजन को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं, जिससे शिक्षक समुदाय में रोष है। हिमाचल प्रदेश महाविद्यालय शिक्षक संघ (एचजीसीटीए) ने इस मुद्दे पर शिक्षा सचिव और शिक्षा विभाग के निदेशक को ई-मेल के जरिये...

मंडी (नीलम): हिमाचल प्रदेश के सरकारी महाविद्यालयों में प्रिंसीपल के पुनर्नियोजन को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं, जिससे शिक्षक समुदाय में रोष है। हिमाचल प्रदेश महाविद्यालय शिक्षक संघ (एचजीसीटीए) ने इस मुद्दे पर शिक्षा सचिव और शिक्षा विभाग के निदेशक को ई-मेल के जरिये ज्ञापन भेजा है। ज्ञापन में संघ ने राज्य सरकार से मांग की है कि बिना प्राधिकरण के जारी रहने वाले प्रिंसीपलों को तुरंत हटाया जाए व शीघ्र ही प्रिंसीपल पद के लिए पदोन्नत हुए शिक्षकों को नियुक्ति दी जाए।

एचजीसीटीए अध्यक्ष डा. बनीता सकलानी का कहना है कि हिमाचल प्रदेश सरकार के वित्त विभाग की अधिसूचना फिन (सी)-ए (3)-2/2013 25 अगस्त, 2025 और इसके बाद के 27 अगस्त के आदेशों में प्रिंसीपलों की पुनर्नियुक्ति का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है। इसके बावजूद कुछ प्रिंसीपल बिना किसी विभागीय आदेश के अपने पदों पर बने हुए हैं, जिससे प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि इस अनिश्चितता के चलते सितम्बर माह में हुई 15 शिक्षकों की पदोन्नति आज तक अधर में लटकी हुई है।

शिक्षा विभाग पर निष्क्रियता का आरोप
एचजीसीटीए ने आरोप लगाया है कि शिक्षा विभाग इस पूरे मामले से पूरी तरह बेखबर है। न तो किसी स्तर पर जांच की जा रही है, और न ही कोई औपचारिक स्पष्टीकरण या दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। संघ के अनुसार विभाग की यह निष्क्रियता प्रशासनिक अव्यवस्था को बढ़ा रही है। संघ ने तर्क दिया है कि महाविद्यालय प्रिंसीपल मुख्य रूप से प्रशासनिक कार्यों में संलग्न रहते हैं और शिक्षण गतिविधियों में उनकी सीधी भागीदारी नहीं होती, इसलिए उन्हें शिक्षण संकाय (टीचिंग फैकल्टी) के रूप में पुनर्नियुक्त करना तर्कसंगत नहीं है।

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