Mandi: बैंक ऋण मामले में अदालत का फैसला: डिफाल्टर को ब्याज समेत 8.70 लाख चुकाने का आदेश

Edited By Kuldeep, Updated: 01 Jan, 2026 10:20 PM

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मंडी के सीनियर सिविल जज की अदालत ने पंजाब नैशनल बैंक द्वारा दायर एक वसूली मामले में अहम फैसला सुनाते हुए टैंट सर्विस और उसके मालिक को बैंक का बकाया पैसा ब्याज सहित चुकाने का आदेश दिया है।

मंडी (रजनीश): मंडी के सीनियर सिविल जज की अदालत ने पंजाब नैशनल बैंक द्वारा दायर एक वसूली मामले में अहम फैसला सुनाते हुए टैंट सर्विस और उसके मालिक को बैंक का बकाया पैसा ब्याज सहित चुकाने का आदेश दिया है। अदालत ने बैंक के पक्ष में डिक्री पारित करते हुए प्रतिवादियों को 8,70,536.57 रुपए की राशि 8.60 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने के निर्देश दिए हैं। मामले के अनुसार नमन टैंट सर्विस के प्रोपराइटर ने 3 अक्तूबर 2013 को पंजाब नैशनल बैंक से कुल 4,00,000 का ऋण लिया था। इसमें 2,50,000 रुपए का टर्म लोन और 1,50,000 रुपए की कैश क्रैडिट लिमिट शामिल थी। ऋण लेते समय प्रतिवादी ने बैंक के साथ आवश्यक दस्तावेजों और हाइपोथेकेशन एग्रीमैंट पर हस्ताक्षर किए थे।

बैंक का आरोप था कि ऋण लेने के बाद प्रतिवादी ने किस्तों के भुगतान में अनियमितता बरती। बैंक ने समय-समय पर (2016 और 2019 में) बैलेंस कन्फर्मेशन पत्र भी भरवाए, लेकिन खाता नियमित नहीं किया गया। अंततः बैंक ने 20 दिसम्बर 2020 तक की बकाया राशि 8,70,536.57 रुपए की वसूली के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष ने तर्क दिया कि वे लॉकडाऊन से पहले तक किस्तें नियमित रूप से दे रहे थे। उन्होंने दलील दी कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा लगाए गए कोविड-19 लाॅकडाऊन के कारण उनका व्यवसाय ठप्प हो गया, जिससे वह समय पर भुगतान नहीं कर सके। उन्होंने आरबीआई. की गाइडलाइंस के तहत राहत की मांग भी की।

अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने और दस्तावेजों की जांच के बाद पाया कि बैंक द्वारा प्रस्तुत स्टेटमैंट ऑफ अकाऊंट्स से स्पष्ट है कि भुगतान में भारी अनियमितता बरती गई है। प्रतिवादी ने 2016 और 2019 में सुरक्षा और बैलेंस कन्फर्मेशन पत्रों पर हस्ताक्षर किए थे, जिससे यह मामला समय सीमा के भीतर था। कोर्ट ने बचाव पक्ष की दलीलों को अपर्याप्त माना और कहा कि बैंक अपनी राशि वसूलने का हकदार है। सीनियर सिविल जज ने आदेश दिया कि प्रतिवादी बैंक को 8,70,536.57 रुपए की मूल राशि के साथ-साथ मुकद्दमा दायर करने की तारीख से लेकर वसूली तक 8.60 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का भुगतान करेंगे। इसके अलावा, मुकद्दमे का खर्च भी प्रतिवादियों को ही वहन करना होगा।

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