Edited By Jyoti M, Updated: 27 Jan, 2026 01:23 PM

हिमाचल प्रदेश के रामपुर उपमंडल में इन दिनों जंगली भालुओं ने ग्रामीणों की रातों की नींद हराम कर रखी है। ताजा मामला नीरथ पंचायत के अंतर्गत आने वाले डोईधार गांव का है, जहां एक खूंखार भालू ने रिहायशी इलाके में घुसकर भारी तबाही मचाई।
हिमाचल डेस्क। हिमाचल प्रदेश के शिमला के रामपुर उपमंडल में इन दिनों जंगली भालुओं ने ग्रामीणों की रातों की नींद हराम कर रखी है। ताजा मामला नीरथ पंचायत के अंतर्गत आने वाले डोईधार गांव का है, जहां एक खूंखार भालू ने रिहायशी इलाके में घुसकर भारी तबाही मचाई। सोमवार की दरम्यानी रात इस जंगली जानवर ने रामानंद मेहता की गोशाला का दरवाजा तोड़कर वहां बंधी एक गर्भवती गाय को अपना शिकार बनाने की कोशिश की। हमले में गाय बुरी तरह लहूलुहान हो गई है, जिससे उसकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
दहशत के साये में ग्रामीण
पिछले तीन महीनों से इस समूचे क्षेत्र में जंगली जानवरों का आतंक चरम पर है। स्थानीय युवाओं ने बताया कि यह कोई पहली घटना नहीं है। महज 13 जनवरी को ही बड़ाच गांव में एक अन्य पशुपालक की गाय को भालू ने मार डाला था। बीते 90 दिनों के भीतर इस क्षेत्र में अब तक एक मवेशी की जान जा चुकी है, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हैं।
ग्रामीणों में इस बात को लेकर गहरा रोष और डर है कि रिहायशी घरों के साथ सटी गोशालाएं भी अब सुरक्षित नहीं रह गई हैं।
प्रशासन से मदद की गुहार
पीड़ित रामानंद मेहता ने राज्य सरकार और संबंधित महकमों को पत्र लिखकर न्याय की मांग की है। उन्होंने आग्रह किया है कि घायल गाय के उपचार के लिए उचित प्रबंध किए जाएं और हमलावर भालू को तुरंत पकड़ा जाए। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पंचायत सहित वन विभाग, पुलिस और पशुपालन विभाग को सूचित कर दिया गया है।
विभाग की कार्रवाई और चुनौती
हैरानी की बात यह है कि बीती 12 दिसंबर को वन विभाग ने नावण गांव के पास एक मादा भालू और उसके दो बच्चों को पकड़ने में सफलता हासिल की थी। उस वक्त लगा था कि खतरा टल गया है, लेकिन हालिया हमलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जंगल में अभी और भी आदमखोर या हिंसक भालू सक्रिय हैं।
वन विभाग का पक्ष: विभागीय अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और भालू को जाल में फंसाने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में पिंजरे लगाए जा रहे हैं।