Shimla: हिमाचली हितों की पैरवी करने अधिकारियों के साथ दिल्ली पहुंचे सीएम सुक्खू

Edited By Kuldeep, Updated: 14 Jan, 2026 10:11 PM

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मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू हिमाचली हितों की पैरवी करने के लिए अधिकारियों की टीम के साथ नई दिल्ली पहुंच गए हैं।

शिमला (कुलदीप): मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू हिमाचली हितों की पैरवी करने के लिए अधिकारियों की टीम के साथ नई दिल्ली पहुंच गए हैं। इस प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सहित अन्य केंद्रीय मंत्रालयों से मुलाकात कर सकते हैं। साथ ही उनकी नीति आयोग के साथ भी मंत्रणा हो सकती है। जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री के साथ मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार, सचिव श्रम एवं रोजगार प्रियंका बासु इंगटी व मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान निजी सचिव राजीव कुमार भी साथ गए हैं।

ऐसे में मुख्यमंत्री का फोकस प्रदेश के लिए उदार वित्तीय मदद उपलब्ध करवाने के अलावा न्यूजीलैंड के सेब पर आयात शुल्क बढ़ाने का मुद्दा प्रमुख रहेगा। वर्तमान में मुक्त व्यापार समझौते (एफ.टी.ए.) के तहत सेब पर आयात शुल्क 50 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी कर दिया गया है, जिसका हिमाचली बागवान कड़ा विरोध कर रहे हैं। इस विषय को केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के साथ उठाया जा सकता है। सेब पर आयात शुल्क में कटौती से प्रदेश के बागवानों को आर्थिक नुक्सान हो रहा है। मुख्यमंत्री केंद्रीय वित्त मंत्री से मुलाकात के दौरान विशेष वित्तीय पैकेज और राज्य की ऋण सीमा बढ़ाने के अलावा प्रधानमंत्री की तरफ से घोषित 1,500 करोड़ रुपए के आपदा राहत पैकेज को शीघ्र जारी करेंगे।

केंद्रीय बजट आने से मुख्यमंत्री का दौरा महत्वपूर्ण
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को वित्तीय वर्ष, 2026-27 का केंद्रीय बजट प्रस्तुत करेंगी। इसको देखते हुए मुख्यमंत्री का यह दौरा महत्वपूर्ण है। इससे पहले केंद्रीय मंत्री से प्री-बजट बैठक में प्रदेश के तकनीकी शिक्षा व टीसीपी मंत्री राजेश धर्माणी प्रदेश का पक्ष रख सकते हैं। मुख्यमंत्री केंद्रीय मंत्री से केंद्रीय योजनाओं में हिमाचल प्रदेश की हिस्सेदारी बढ़ाने और राजस्व घाटा अनुदान राशि बढ़ाने जैसे विषयों पर चर्चा कर सकते हैं।

कांग्रेस नेताओं से कर सकते हैं मंत्रणा
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू अपने दौरे के दौरान कांग्रेस नेताओं से मंत्रणा कर सकते हैं। इस मुलाकात के दौरान सत्ता-संगठन से जुड़े विषयों को लेकर चर्चा हो सकती है। ऐसे में केंद्रीय नेतृत्व की अनुमति मिलने पर आगामी समय में मंत्रिमंडल विस्तार सहित संगठनात्मक स्तर पर नई नियुक्तियां देखने को मिल सकती हैं।

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