Edited By Jyoti M, Updated: 19 Mar, 2026 02:57 PM

कभी-कभी पुण्य कमाने की एक छोटी सी इच्छा भी जानलेवा साबित हो सकती है। लुहणू घाट के तट पर मछलियों को आहार देने पहुंची एक महिला के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। जिसे वह पानी का किनारा समझ रही थीं, वह असल में एक गहरा और जानलेवा दलदल था।
बिलासपुर। कभी-कभी पुण्य कमाने की एक छोटी सी इच्छा भी जानलेवा साबित हो सकती है। लुहणू घाट के तट पर मछलियों को आहार देने पहुंची एक महिला के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। जिसे वह पानी का किनारा समझ रही थीं, वह असल में एक गहरा और जानलेवा दलदल था। देखते ही देखते वह महिला जमीन के अंदर समाने लगी, लेकिन ठीक उसी वक्त वहां मौजूद कुछ 'देवदूतों' ने अपनी जान पर खेलकर उन्हें नई जिंदगी बख्शी।
जब खामोश जमीन निगलने लगी जिंदगी
यह हादसा उस वक्त हुआ जब महिला धार्मिक आस्था के चलते जलचरों को दाना डाल रही थीं। किनारों की रेतीली जमीन के नीचे छिपे खतरनाक दलदल का उन्हें रत्ती भर भी अंदाजा नहीं था। जैसे ही उन्होंने कदम आगे बढ़ाए, कुदरत के इस जाल ने उन्हें जकड़ लिया। मौके पर मची चीख-पुकार ने आसपास के लोगों के हाथ-पांव फुला दिए।
इस संकट की घड़ी में स्थानीय बोट चालक विजय चंद और ओमप्रकाश किसी मसीहा से कम साबित नहीं हुए। उनके साथ होमगार्ड के जवान कुलदीप और अन्य साथियों ने तुरंत मोर्चा संभाला। इन मल्लाहों को इस इलाके की नस-नस का पता है, इसलिए उन्हें मालूम था कि कहां पैर रखना है और कहां नहीं। उन्होनें महिला को मौत के मुंह से सुरक्षित खींच निकाला।
बेजुबानों के रक्षक, अब इंसानों के भी मददगार
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब इन बोट चालकों ने अपनी जान जोखिम में डाली हो। चिलचिलाती गर्मियों में जब तट सूखकर दलदल बन जाते हैं, तब अक्सर प्यासी गाएं इसमें फंस जाती हैं। ये जांबाज मल्लाह दरिया के उस पार के रहने वाले हैं और भौगोलिक परिस्थितियों के माहिर खिलाड़ी हैं, जो अब तक दर्जनों बेजुबानों की जान बचा चुके हैं।