Edited By Jyoti M, Updated: 04 Mar, 2026 01:29 PM

हिमाचल प्रदेश अपनी औद्योगिक नीति को नया विस्तार देने के लिए तैयार है। हाल ही में शिमला में अतिरिक्त मुख्य सचिव आरडी नजीम की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें प्रदेश के भीतर नए औद्योगिक क्लस्टर (Industrial Clusters) विकसित करने की रणनीति...
हिमाचल डेस्क। हिमाचल प्रदेश अपनी औद्योगिक नीति को नया विस्तार देने के लिए तैयार है। हाल ही में शिमला में अतिरिक्त मुख्य सचिव आरडी नजीम की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें प्रदेश के भीतर नए औद्योगिक क्लस्टर (Industrial Clusters) विकसित करने की रणनीति पर चर्चा की गई।
सरकार का मुख्य उद्देश्य निवेश को आकर्षित करना और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। प्रारंभिक सर्वेक्षण के आधार पर, सरकार ने औद्योगिक विस्तार के लिए चार प्रमुख जिलों को चिह्नित किया है। जिनमें सिरमौर, हमीरपुर, मंडी और कांगड़ा शामलि है ।
इन क्षेत्रों में उपलब्ध बुनियादी ढांचे और भविष्य की संभावनाओं का आकलन किया जा रहा है ताकि उद्योगों को मैदानी इलाकों से निकालकर पहाड़ी क्षेत्रों तक ले जाया जा सके और क्षेत्रीय विकास में संतुलन बनाया जा सके।
वर्तमान परिदृश्य और बुनियादी ढांचा
वर्तमान में हिमाचल में बीबीएन (बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़), काला अंब, और मेहतपुर जैसे 10 सक्रिय क्लस्टर हैं, जहाँ फार्मा, सीमेंट और खाद्य प्रसंस्करण जैसी इकाइयां कार्यरत हैं। नए क्लस्टर मॉडल की खासियत यह होगी कि यहाँ सूक्ष्म और लघु उद्योगों को साझा बुनियादी ढांचा (Shared Infrastructure) मिलेगा, जिससे उनकी उत्पादन लागत कम होगी।
वित्तीय अनुमान और निवेश
एक मध्यम आकार के क्लस्टर (50-100 एकड़) को विकसित करने का अनुमानित खर्च 50 करोड़ से 150 करोड़ रुपये के बीच आ सकता है। यह लागत सड़कों, बिजली, जल निकासी और साझा सुविधा केंद्रों के निर्माण पर निर्भर करेगी। यदि सरकार अपनी भूमि का उपयोग करती है, तो परियोजना की लागत काफी कम हो सकती है।